सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका के परीक्षण का निर्णय लिया, जिसमें सरकार को राजमार्ग सहित अन्य सड़कों के निर्माण के समय भी सभी सार्वजनिक सेवाओं के लिए अनिवार्य रूप से नलिका (डक्ट) बनाने का निर्देश देने की गुहार लगाई गई है।
याचिका में कहा गया है कि ऐसा करने से सड़कों को रोजाना बेवजह खोदने की नौबत नहीं आएगी। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इसे अच्छा आइडिया बताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता हरिप्रिया पटेल का कहना है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग-10 के बगल में रहती है। उनका कहना है कि आए दिन राजमार्ग पर होने वाले मरम्मत कार्य के लिए सड़कों को खोदने से न केवल लोगों को असुविधा होती है बल्कि कई सड़क दुर्घटनाएं भी होती हैं।
याचिका में कहा गया है कि इयसे सरकारी पैसे का भी दुरुपयोग हो रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 25 नवंबर 2016 को दिशानिर्देश दिया था कि सड़कों के निर्माण के वक्त डक्ट बनाए जाएं, लेकिन इस दिशानिर्देश का पालन अनिवार्य रूप से नहीं किया जा रहा है।