लिंगायत मठ के संत शिवमूर्ति मुरुघा
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लिंगायत मठ के प्रमुख शिवमूर्ति मुरुघा शरणारू को आज कोर्ट के आदेश पर 14 सितंबर तक के लिए जेल भेज दिया गया। इस बीच, शरणारू के समर्थकों द्वारा एनजीओ को धमकियां देने का मामला सामने आया है। मैसूरू के इस एनजीओ ने मठ प्रमुख के खिलाफ केस दर्ज कराने में पीड़िताओं की मदद की थी।
चार दिनी की पुलिस हिरासत खत्म होने पर शरणारू को कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। एनजीओ ने लगातार मिल रही धमकियों की पुलिस में शिकायत करते हुए अपने सदस्यों की सुरक्षा की गुहार लगाई है। हाई स्कूल की दो नाबालिग छात्राओं के साथ यौन शोषण के आरोपों के बाद शिवमूर्ति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और एससी एसटी एक्ट में मामला दर्ज किया गया था। उन्हें गुरुवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था। पुलिस हिरासत आज पूरी होने पर उन्हें फिर कोर्ट में पेश किया गया।
जान से मारने की धमकी दी गई
एनजीओ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें दावा किया गया है कि तीन सितंबर को मठ के सदस्यों की ओर से जान से मारने की धमकी दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मुरुघ मठ के संत शरणारू के समर्थक व अनुयायी हमारे संगठन के स्टेनली केवी और एमएल परशुराम को फोन करके जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पुलिस उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ उनके परिवारों को भी सुरक्षा मुहैया कराए।
डीएनए व अन्य परीक्षण किए गए
इस बीच, मामले के जांचकर्ताओं के अनुसार शनिवार को शरणारू का डीएनए व पौरुष परीक्षण (potency test) किया गया। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाएगी। शरणारु जिस, जगद्गुरु मुरुगराजेंद्र विद्यापीठ मठ से जुड़े हैं, वह कर्नाटक में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लिंगायत समुदाय का है। लिंगायत कर्नाटक का सबसे बड़ा समुदाय है।
क्या है मामला?
दरअसल, शिवमूर्ति शरणारू समेत पांच व्यक्तियों पर हाईस्कूल की दो छात्राओं के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारी की शिकायत के आधार पर मठ के छात्रावास के वार्डन समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। नाबालिग लड़कियों ने पहले मैसूरू के उक्त एनजीओ से संपर्क किया था और काउंसलिंग के दौरान अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में जानकारी दी थी।