अगले लोकसभा चुनाव को देखते हुए नीतीश कुमार विपक्ष को एक साथ जोड़ने की कोशिशों में जुटे हैं। वे अलग-अलग राज्यों का दौरा कर विपक्षी दलों के नेताओं को न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अंतर्गत एक मंच पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी बीच उनके समर्थकों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताने का काम शुरू कर दिया है। उनके विचारों को ज्यादा प्रभावी, लोकप्रिय और जन स्वीकार्य बनाने के लिए उनके समर्थकों ने 'नीतीश विचार मंच' का गठन किया है। इस मंच के माध्यम से देश के अलग-अलग राज्यों में सेमिनार और अन्य कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को इसके साथ जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
2014 के लोकसभा चुनाव के पहले वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी इसी तरह के अनेक मंचों का गठन किया गया था जिनके माध्यम से उन्हें देश के अलग-अलग वर्गों में लोकप्रिय बनाने की कोशिश की गई थी। नीतीश विचार मंच को भी उसी तरह की एक कोशिश माना जा रहा है।
जेडीयू नेता और 'नीतीश विचार मंच' के राष्ट्रीय संयोजक बनाए गए सत्य प्रकाश मिश्रा ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री का लंबा राजनीतिक जीवन बिल्कुल बेदाग रहा है। उनके ऊपर भ्रष्टाचार का एक आरोप तक नहीं लग सका है। उन्होंने ऐसे समय में समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाने की कोशिश की है, जब जातियों, पंथ और वर्ग के नाम पर लोगों को अलग-अलग खेमों में बांटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश को इसी तरह के विचार की जरूरत है, जो विपरीत सोच रखने वालों को भी एक साथ लेकर चल सके। इस मंच के माध्यम से उनका प्रयास रहेगा कि नीतीश कुमार की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाया जाए।