समय का पता नहीं चलता और सबकुछ बदल जाता है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर यह कहावत सटीक बैठ रही है। राहुल गांधी पहले भी हमला बोलते थे। यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार पर हमला बोला था और मोदी सरकार पर हमला बोलते रहे हैं।
लेकिन अब राहुल गांधी को गंभीरता से लेने वालों की तादाद बढ़ रही है। राहुल गांधी को पप्पू के तकिया कलाम से संबोधित करके व्यंग्य किया जाता था। पहले कांग्रेस नेताओं को यह तंज चुभता था और अब राहुल की टिप्पणी के बाद आ रही प्रतिक्रिया को देखकर कोई इसकी परवाह नहीं कर रहा है।
गुरुद्वारा रकाबगंज में कांग्रेस पार्टी की भावी रणनीति के लिए सक्रिय रहने वाली टीम के एक सदस्य का कहना है कि तीन से साल अधिक के समय में मोदी सरकार के पास गिनाने के लिए कुछ नहीं है। केन्द्र सरकार के हाथ खाली हैं।
इसे जनता महसूस करने लगी है। वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष के पास गंवाने के लिए कुछ और नहीं है। सूत्र का कहना है कि यह वह दौर है, जब भाजपा और कांग्रेस दोनों के रणनीतिकार हर विकल्प पर काम कर रहे हैं। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी की स्वीकारोक्ति तेजी से बढ़ रही है।
सेमीफाइनल हैं राज्यों के चुनाव
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कांग्रेस पार्टी गुजरात, हिमाचल, राजस्थान, म.प्र., छत्तीसगढ़ समेत लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले अन्य राज्यों के चुनाव को काफी अहम मान रही है। हिमाचल और गुजरात विधानसभा के चुनाव को क्वार्टर फाइनल तो अन्य राज्यों के चुनाव सेमी फाइनल मानकर चल रही है।
खासकर गुजरात से कांग्रेस को काफी उम्मीद है। पाटीदार समाज का मिल रहा समर्थन, सौराष्ट्र क्षेत्र में उमड़ रही भीड़ काफी कुछ संकेत दे रही है। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी गुजरात की तीन दिन की यात्रा पर है।
जिस दिन वह गुजरात से दिल्ली लौटेंगे उसके बाद राज्य का राजनीतिक समीकरण तेजी से संकेत देने लगेगा। क्योंकि हम (कांग्रेस) गुजरात को लेकर काफी आश्वस्त हैं। वैसे भी यह चुनाव पार्टी के रणनीतिकार, कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के लिए भी करो या मरो जैसा है। वहीं हिमाचल के बारे में सूत्र का कहना है कि वहां भाजपा और कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुकाबला होगा।
विदेश में बढ़ी राहुल की मांग
राहुल गांधी देश के भीतर अपनी छवि सुधार रहे हैं तो विदेशों में भी यही स्थिति है। वह अमेरिका के दौरे से लौटे हैं। वहां कांग्रेस उपाध्यक्ष ने तमाम मुद्दों पर अपने विचार रखे थे। उसकी अच्छी प्रतिक्रिया आ रही है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष के कार्यालय सूत्रों के अनुसार विदेशों में राहुल गांधी की मांग बढ़ी है। नामी-गिरामी संस्थाएं उन्हें अपने यहां आमंत्रित करने के लिए प्रस्ताव भेज रही हैं। हालांकि ऐसे सभी मामले अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के पास भेज दिए जाते हैं, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कांग्रेस उपाध्यक्ष ब्रिटेन का दौरा कर सकते हैं।