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कर्नाटक मेडिकल कॉलेज ने रद्द किया प्रवेश, नेत्रहीन छात्र ने दी आत्महत्या की धमकी

Tue, 26 Sep 2017 04:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कर्नाटक के एक मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के एक नेत्रहीन छात्र ने आत्‍महत्या की धमकी दी है। छात्र की धमकी के बाद एमसीआई ने कॉलेज से पूछा है कि इस मामले में छात्र की काउंसलिंग कर जवाब दे। एमबीबीएस सेकंड इयर स्‍टूडेंड को ब्लाइंडनेस के चलते उसका प्रवेश रद्द कर दिया गया था।
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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक कर्नाटक रायचूर के रहने वाले 19 वर्षीय सुरेश नेत्रहीन हैं। रायचूर कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस ने सुरेश का प्रवेश रद्द कर दिया। एक डॉक्टर के आधार पर एमसीआई ने पाया कि उनकी हालत गंभीर है जिसके चलते उसका प्रवेश रद्द कर दिया। इस मामले के बाद सुरेश ने आत्महत्‍या की धमकी दी है।

एमसीआई ने इस पूरे प्रकरण पर कॉलेज प्रशासन से जवाब तलब किया है। इसके अलावा एमसीआई ने कॉलेज और रायचूर के जिलाधिकारी को इस मामले को गंभीरता से देखने के लिए कहा है। 
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बीते 26 जून 2017 को सुरेश के प्रवेश को रद्द करने का आदेश दिया गया। सुरेश ने 28 अगस्त को एमसीआई  को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने आत्महत्या करने के बारे में कहा है।

एमसीआई के नियमों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए 50 से 70 फीसदी दिव्यांग उम्मदीवार के लिए एक सीट आरक्षित है। अधिक गंभीर स्थिति वाला कोई भी उम्मीदवार प्रवेश के लिए पात्र नहीं है।

सुरेश ने अपने प्रवेश को रद्द करने के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने अंतिम आदेश फरवरी 2018 तक पढ़ाई जारी रखने को कहा है।

गौरतलब है कि अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस की प्रवेश परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले दो कलर ब्लाइंड (रंगों में फर्क ना कर पाने वाले) छात्रों को अगले एकेडमिक ईयर के लिए दाखिला देने का आदेश दिया।

अदालत के इस आदेश ने कलर ब्लाइंड छात्रों के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई करने का रास्ता खोल दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने कदम को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों से उसे संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ी।

दोनों छात्रों ने नीट से पहले, वर्ष 2015 में त्रिपुरा सरकार द्वारा आयोजित कराई गई प्रवेश परीक्षा में काफी अच्छे अंक हासिल किए थे।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हम अपीलकर्ता को अकादमिक वर्ष 2018-19 के लिए प्रतिवादी संख्या दो को कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने और उस वर्ष के लिए कोटे से दो सीटे कम करने का आदेश देते हैं।

इससे पहले एमसीआई और त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज ने शुरुआत में इन छात्रों को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला देने पर आपत्ति जताई थी क्योंकि प्रवेश परीक्षा में पास होने के बावजूद ये कलर ब्लाइंडनेस से पीड़ित थे।
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