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2050 तक एक करोड़ लोगों की मौत की वजह बनेंगे सुपरबग्स! रैपिड टेस्ट बचा सकता है जान

Fri, 06 Sep 2019 08:17 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
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एंटीबायोटिक दवाओं के आविष्कार के साथ ही इनसे अनेकों बीमारियों से लड़ने में मदद मिली। जिसकी वजह से अब तक लाखों लोगों की जान बचाई जा चुकी है। लेकिन एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल के दुष्प्रभाव अब सामने आने लगे हैं। अनेक बैक्टीरिया इन दवाओं से लड़ने की क्षमता विकसित कर चुके हैं, जिससे अब एंटीबायोटिक दवाओं का उन पर कोई असर नहीं हो रहा है। तकनीकी भाषा में इन्हें 'सुपरबग' कहा जा रहा है।

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वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन सुपरबग के कारण 2050 तक एक करोड़ लोगों की जान जा सकती है। लेकिन अब वैज्ञानिक ऐसी तकनीकी के विकास में लगे हैं, जो यह बताने में सक्षम होगा कि किसी मरीज को कोई एंटीबायोटिक देने की आवश्यकता है या नहीं। वहीं अगर उसे एंटीबायोटिक दवा देनी चाहिए तो किस प्रकार की दवा उसके लिए उपयुक्त होगी।

सही एंटीबायोटिक के लिए 24 घंटे तक इंतजार

नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम और साइंस म्यूजियम ग्रुप लंदन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सरकार के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सलाहकार वैज्ञानिक डॉ. सुदीप सरीन ने कहा कि किसी मरीज के लिए कोई एंटीबायोटिक सही है या नहीं, यह पता लगाने के लिए कम से कम 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में 24 से 48 घंटे तक के इंतजार के बाद यह पता चलता है कि मरीज को दूसरा एंटीबायोटिक देने की आवश्यकता है। लेकिन इस अहम समय के बीच अनुपयुक्त दवा दिये जाने के कारण मरीज की हालत भी खराब होती रहती है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित होता है।

रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट कारगर

डॉ. सुदीप सरीन ने कहा कि रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट से आधे से दो घंटे के बीच मरीज के खून, पेशाब या संबंधित बीमार अंग का अध्ययन करके यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मरीज को कौन सी एंटीबायोटिक देना सही होगा। इससे महत्वपूर्ण समय और मरीज की जान बचाई जा सकेगी। डॉ. सुदीप सरीन ने बताया कि यह तकनीक अभी परीक्षण के दौर में है और इसके बाजार में आने में दो से तीन साल का समय लग सकता है। इसके लिए लोंगिट्यूड नेस्टा चैलेंज भी आयोजित किया जा रहा है जिसमें भारत की तीन कंपनियों समेत विश्व की 64 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।  

इस सवाल पर कि यह तकनीकि भारत जैसे देश के लिए कितनी किफायती होगी, नेस्टा चैलेंज के ग्लोबल हेल्थ प्रमुख डैनियल बर्मन ने कहा कि वे इस तकनीकी को बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराएंगे, जिससे सामान्य लोग भी इसका लाभ उठा सकें।

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