सुकमा हमले में जिधर से नक्सली गोली चला रहे उधर सड़क निर्माण सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ जवानों को सिर्फ गांव के बूढे, बच्चे और महिलाएं ही नजर आ रहे थे। यही वजह थी कि अति आधुनिक स्वचलित हथियारों से लैस होने के बावजूद जवान कारगर जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। इससे पहले कि नक्सलियों के इस मानव ढाल के कायरतापूर्ण हरकत का इल्म होता करीब 31 जवानों के शरीर को गोलियां बेध चुकी थी। इनमें 25 की मौत हो गई।
सुकमा हमले की ऐसी बारीक जानकारियां गृहमंत्रालय में नक्सल मामलों के सलाहकार के विजय कुमार और सीआरपीएफ के कार्यकारी महानिदेशक सुदीप लखटकिया केरिपोर्ट में है। इन अधिकारियों ने बृहस्तपतिवार को यह रिपोर्ट गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सौंप दी।
खुद राजनाथ ने कुमार और लखटकिया को सुकमा में हीं कैंप कर हमले की पूरी सच्चाई पता लगाने की जिम्मेदारी दी थी। रिपोर्ट सौंपने के बाद इन दोनों अधिकारियों ने गृहराज्य मंत्री हंस राज अहिर और गृहसचिव राजीव महर्षि के साथ लंबी बैठक की।
रिपोर्ट केमुताबिक हमले केसमय 36 जवान सुरक्षा केलिहाज सड़क निर्माण स्थल पर दो जगहों पर बंटे हुए थे। नस्लियों ने बड़ी चालाकी से मानव ढाल के पीछे से पहले टुकडे पर हमला किया। जब इस टुकड़ी ने बचाव को पोजिशन लिया तो नक्सलियों के सीधा दूसरी टुकड़ी पर हमला बोल दिया। रिपोर्ट में लिखा गया है कि गोली चलने की दिशा में गांव वालों की मौजूदगी की वजह से जवान गोली खाते रहे। रिपोर्ट के मुताबिक नक्सलियों की संख्या काफी अधिक थी।
हालांकि गांव वालों की मौजूदगी की वजह से उनकी संख्या का पता नहीं चल ।पाया। रिपोर्ट में यह माना गया है कि सुरक्षा बल के लगभाग एक ही समय में रोज आवाजाही की वजह से वह नक्सलियों का आसान शिकार बन गए। व्यवहारिक दिक्कतों का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि उन इलाकों में सड़क निर्माण का काम पांच से आठ घंटा ही चल पाता है।