माओवादियों ने कहा है कि सुकमा हमला 2016 के हमलों में हुई मौतों का बदला है, जिनमें हमारे काफी लोग मारे गए हैं। सुकमा हमले में मारे गए 25 सीआरपीएफ जवानों की जिम्मेदारी माओवादी की विशेष क्षेत्रीय कमेटी दांडा करण्य ने ली है। बता दें कि मामले में राजनीतिक शासकों की ओर से पुलिस, अर्धसैनिक बलों के जवानों और ज्यूनियर अधिकारियों से कहा गया है कि वे 'अपने जीवन का त्याग करना बंद करें' और नक्सलियों को करारा जवाब दें।
द् इकोनॉमिक्स टाइम्स के मुताबिक माओवादियों के द्वारा जारी एक पांच मिनट की ऑडियो क्लिप में माओवादी मुखिया ने इस बात से इनकार किया है कि हमले में मारे गए सीआरपीएफ के जवानों के शवों का उत्पीड़न हुआ है।
डीकेएसजेडसी ने दावा किया कि 24 अप्रैल का सुकमा हमला पिछले साल के चिंतागुफा-बर्कापल मुठभेड़ का बदला है। उन्होंने कहा कि इसमें 11 मार्च का भी हमला शामिल है, जिसमें उनके लोग मारे गए थे। बता दें कि इस हमले में12 सीआरपीएफ जवानों ने अपनी जान गंवा दी थी।
उन्होंने आगे कहा कि यह राज्य और केंद्र सरकार से मिशन 2016 का बदला है, जिसमें डीके का हमला शामिल है, इसमें 9 कामरेड मारे गए और एक अन्य आंध्र-ओडिशा सीमा में हमारे 21 साथी तथा ओडिशा गांव के 9 युवक मारे गए थे।