करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी
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जयपुर के छोटे से इलाके से शुरू हुआ संगठन
इस संगठन की शुरुआत बतौर श्री राजपूत करणी सेना (SRKS) सितंबर 2006 में हुई थी। 'करणी' शब्द माता करणी से लिया गया है, जिन्हें हिंगलाज का अवतार माना जाता है। इस संगठन की शुरुआत राजस्थान की राजधानी में एक छोटे से इलाके झोटवाड़ा से हुई थी।
राजपूत समाज के नेता लोकेंद्र सिंह कालवी ने महिपाल सिंह मकराना, विश्वबंधु सिंह राठौड़ और अन्य के साथ मिलकर इसकी स्थापना की। कालवी के पिता कल्याण सिंह कालवी केंद्र में चंद्रशेखर सरकार में मंत्री रहे हैं। इसके अलावा राज्य में भी मंत्री रहे। 2006 में कुछ बेरोजगार युवाओं द्वारा शिक्षा और सरकारी नौकरियों में राजपूत समाज की हिस्सेदारी की मांग को लेकर बना यह संगठन कहता है कि वह राष्ट्रीय एकता का पक्षधर है और जाति-केंद्रित आरक्षण और भ्रष्टाचार का विरोध करता है। अजीत सिंह इसके पहले अध्यक्ष बने।
बंट गए धड़े
यूं तो संगठन राजनीतिक नहीं था, लेकिन चुनावों में समय-समय पर भाजपा या कांग्रेस को इसका सशर्त समर्थन मिलता रहा है। 2008 में राजस्थान विधानसभा चुनावों में संगठन ने इस बात पर कांग्रेस का समर्थन किया कि पार्टी एक निश्चित संख्या में राजपूत समाज के लोगों को टिकट देगी। उस वक्त कालवी का कांग्रेस से जुड़ाव था, वहीं संगठन के पहले मुखिया अजीत सिंह कांग्रेस से विधानसभा का टिकट चाहते थे।
हालांकि, इन बातों ने दोनों नेताओं के बीच मतभेद पैदा कर दिया और अंततः संगठन में टूट हो गई। अजीत सिंह ने अलग होकर एक नया धड़ा बना लिया। बात यहीं नहीं रुकी और अजीत सिंह ने कालवी वाले धड़े के खिलाफ मामला दर्ज कराया कि श्री राजपूत करणी सेना नाम उन्होंने पंजीकृत कराया था।
2015 में श्री राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना संगठन बना
अजीत सिंह के संगठन से अलग होने के बाद कालवी ने सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को अपने गुट का अध्यक्ष नियुक्त किया। बाद में कालवी और गोगामेड़ी के बीच भी आरक्षण के मुद्दे पर मतभेद उत्पन्न हुए। 2015 में गोगामेड़ी को संगठन से अलग कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने श्री राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना के नाम से अलग संगठन बना लिया।
गोगामेड़ी श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष बने। बाद में उन्होंने बसपा के टिकट पर दो बार सियासी किस्मत आजमाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले सुखदेव भाजपा से टिकट चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें मौका नहीं दिया।
2018 तक आते-आते करणी सेना के कई धड़े बन गए। इनमें लोकेंद्र सिंह कालवी की श्री राजपूत करणी सेना, अजीत सिंह मामडोली की श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना समिति, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और सूरजपाल अम्मू की करणी सेना शामिल है।
2021 में दो धड़े श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और श्री राजपूत करणी सेना फिर से एक हो गए। इसके साथ ही श्री राजपूत करणी सेना (मूल) का विलय श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना में हो गया। इसी साल मार्च में करणी सेना के संस्थापक लोकेंद्र सिंह कालवी का हार्ट अटैक के कारण निधन हो गया।
फिल्म पद्मावत का विरोध
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फिल्मों के विरोध की वजह से चर्चा में रहा संगठन
जब 2008 में फिल्म जोधा अकबर रिलीज हुई थी, तब SRKS ने विरोध किया था। इसकी आपत्ति मुस्लिम शासक अकबर और एक हिंदू राजपूत राजकुमारी के बीच विवाह के चित्रण पर थी। एसआरकेएस ने जोधा अकबर फिल्म के निर्माता आशुतोष गोवारिकर से माफी की मांग की थी और राजस्थान के सिनेमाघरों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद संगठन ने 2010 में आई फिल्म 'वीर' पर आपत्ति जताई, जिसमें उनका दावा था कि इससे उनके 'बहादुर समाज' को बदनाम किया गया है। संगठन ने फिल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया।
2017 में करणी सेना एक बार फिर चर्चा में आई, जब इसने रणवीर सिंह, शाहिद कपूर और दीपिका पादुकोण अभिनीत फिल्म 'पद्मावत' का विरोध किया। यह फिल्म सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी की महाकाव्य पद्मावत (1540) पर आधारित थी। संगठन का दावा था कि फिल्म राजपूत इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश रही है और सामुदाय की भावनाओं को आहत कर रही है।