प्राकृतिक आपदा से फसल के नुकसान व कर्ज चुकाने में नाकाम होने पर किसानों के आत्महत्या करने की घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद संवेदनशील बताया है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति एनवी रमण की पीठ ने केंद्र सहित सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए किसानों द्वारा खुदकुशी करने के कारण बताने के लिए कहा है। पीठ ने साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(आरबीआई) को भी नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
पीठ ने कहा कि यह मसला जनहित से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को इस आपसी भागीदारी के जरिए प्रभावी नतीजे पर पहुंचाने की दरकार है। पीठ सिटिजन रिर्सोसेज एंड एक्शन एंड इनिसयेटिव नामक गैर सरकारी संगठन द्वारा जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।
यचिका में कृषि नीति और सूखे व प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली फसलों की क्षति पर किसानों को मिलने वाले मुआवजे की नीति में व्यापक सुधार करने की गुहार की गई है। वास्तव में याचिका में गुजरात सरकार को उन 692 किसानों के परिवारवालों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने की गुहार की गई थी जिन्होंने वर्ष जनवरी 2003 से अक्टूबर 2012 के बीच खुदकुशी की थी।