हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य युद्धपोत और मर्चेंट शिपिंग दोनों की गतिविधियों की निगरानी के साथ ही देश की निगरानी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए रविवार को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा विकसित ‘सिंधू नेत्र’ उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया गया।
उपग्रह को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान)- सी 51 का उपयोग करके लॉन्च किया गया, जिसका आज सुबह 10:30 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण हुआ।
इसके अलावा भारत के पीएसएलवी (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान) सी-51 के जरिये ब्राजील के अमेजोनिया-1 और 18 अन्य उपग्रहों का रविवार को यहां श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से सफल प्रक्षेपण किया गया। इनमें से पांच उपग्रह छात्र निर्मित हैं।
इन छोटे उपग्रहों में चेन्नई स्थित स्पेस किड्ज इंडिया द्वारा निर्मित ‘सतीश धवन सैटेलाइट (एसडीसैट) भी शामिल है, जो कि तीन उपग्रहों ‘यूनिटीसैट’ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शन उपग्रह ‘सिंधू नेत्र’ का संयोजन है।
तीन उपग्रहों (यूनिटीसैट) को जेप्पियार इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, श्रीपेरम्बदूर (जेआईटीसैट), जी एच रायसोनी कालेज आफ इंजीनियरिंग, नागपुर (जीएचआरसीईसैट) और श्री शक्ति इंटीट्टयूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोयम्बटूर (श्री शक्ति सैट) के बीच संयुक्त विकास के तहत डिजाइन और निर्मित किया गया है।
बेंगलुरु-मुख्यालय में इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि ‘यूनिटीसैट का उद्देश्य रेडियो रिले सेवाएं प्रदान करना है।’ एसडीसैट एक नैनो उपग्रह है, जिसका उद्देश्य विकिरण स्तर/अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करना और लंबी दूरी की संचार प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करना है।
वहीं, सिंधू नेत्र को बेंगलुरु स्थित पीईएस विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा विकसित किया गया है, जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के हिस्से, रिसर्च सेंटर इमरत द्वारा 2.2 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था। एक अधिकारी ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा यह परियोजना उपग्रह इमेजिंग के माध्यम से संदिग्ध जहाजों की पहचान करने में मदद करेगी।