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पेगासस स्पाईवेयर: क्या अपने ही राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का इशारा समझेगी सरकार?

शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 21 Jul 2021 06:47 PM IST

सार

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि सरकार को संसद में बताना चाहिए कि जिस इस्राइली कंपनी ने भारत में फोन टैपिंग की है, उससे केन्द्र सरकार का कोई संबंध नहीं है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो अमेरिका के वाटरगेट कांड की तरह सच्चाई सामने आएगी और भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है...
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राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी - फोटो : ANI (File)

पेगासस फोन हैकिंग मामले में केंद्र सरकार के जवाब से विपक्षी नेता संतुष्ट नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार सच्चाई को छिपाकर बचना चाहती है। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विन वैष्णव ने भी बयान दिया है, लेकिन विपक्ष के नेता वैष्णव के बयान से सहमत नहीं है। इस बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा इशारा कर दिया है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि स्वामी का इशारा सरकार को समझना चाहिए।

क्या है सुब्रमण्यम स्वामी का इशारा?

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि सरकार को संसद में बताना चाहिए कि जिस इस्राइली कंपनी ने भारत में फोन टैपिंग की है, उससे केन्द्र सरकार का कोई संबंध नहीं है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो अमेरिका के वाटरगेट कांड की तरह सच्चाई सामने आएगी और भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वामी जो कह रहे हैं, विपक्ष को भी उसी का जवाब चाहिए। विपक्ष जानना चाहता है कि क्या केंद्र सरकार ने इस्राइल की कंपनी से कोई करार किया था? यदि किया था तो क्या था और इस्राइल की कंपनी ने क्या करार की शर्तों का कोई उल्लंघन किया है? विपक्ष जानना चाहता है कि आखिर इस्राइल की कंपनी ने किस अधिकार और व्यवस्था के तहत विपक्ष के भारतीय नेताओं, पत्रकारों समेत अन्य का फोन टैप किया? सनद रहे कि सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे ही कोई सवाल नहीं उठाते।

फोन टैपिंग का मामला केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए विपक्ष के आरोपों की जद में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैं। अमित शाह के बहाने विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार को निशाने पर ले रहा है।

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राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी - फोटो : ANI (File)
पेगासस फोन हैकिंग मामले में केंद्र सरकार के जवाब से विपक्षी नेता संतुष्ट नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार सच्चाई को छिपाकर बचना चाहती है। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विन वैष्णव ने भी बयान दिया है, लेकिन विपक्ष के नेता वैष्णव के बयान से सहमत नहीं है। इस बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा इशारा कर दिया है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि स्वामी का इशारा सरकार को समझना चाहिए।

क्या है सुब्रमण्यम स्वामी का इशारा?

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि सरकार को संसद में बताना चाहिए कि जिस इस्राइली कंपनी ने भारत में फोन टैपिंग की है, उससे केन्द्र सरकार का कोई संबंध नहीं है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो अमेरिका के वाटरगेट कांड की तरह सच्चाई सामने आएगी और भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वामी जो कह रहे हैं, विपक्ष को भी उसी का जवाब चाहिए। विपक्ष जानना चाहता है कि क्या केंद्र सरकार ने इस्राइल की कंपनी से कोई करार किया था? यदि किया था तो क्या था और इस्राइल की कंपनी ने क्या करार की शर्तों का कोई उल्लंघन किया है? विपक्ष जानना चाहता है कि आखिर इस्राइल की कंपनी ने किस अधिकार और व्यवस्था के तहत विपक्ष के भारतीय नेताओं, पत्रकारों समेत अन्य का फोन टैप किया? सनद रहे कि सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे ही कोई सवाल नहीं उठाते।

फोन टैपिंग का मामला केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए विपक्ष के आरोपों की जद में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैं। अमित शाह के बहाने विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार को निशाने पर ले रहा है।

अमित शाह ने दिया जवाब

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पेगासस फोन टैपिंग प्रकरण पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने इस मुद्दे को उठाने के समय (क्रोनोलॉजी) से जोड़ते हुए इसे केन्द्र सरकार के खिलाफ एक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि विघटनकारी शक्तियां ऐसा करके देश की विकास यात्रा को नहीं रोक पाएंगी। अमित शाह ने इसके लिए कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को आड़े हाथों लिया। लेकिन केन्द्रीय गृहमंत्री ने पेगासस मामले को लेकर यह नहीं बताया कि इसके लिए केन्द्र सरकार ने इस्राइली कंपनी की कोई सेवा ली थी या नहीं?

सुब्रमण्यम स्वामी इसी को लेकर सरकार को नसीहत दे रहे हैं। स्वामी ने जिस वाटरगेट कांड का जिक्र किया है, वह अमेरिका का मशहूर टैपिंग कांड था। इसमें तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने वाटरगेट होटल कॉम्पलेक्स में रिकार्डिंग डिवाइस लगवा दी थी। ताकि उन्हें रिपब्लिकन नेताओं की बातचीत आदि के बारे में जानकारी मिल सके। इस मामले ने पूरी दुनिया में रिचर्ड निक्सन की बदनामी और राष्ट्रपति पद से उनकी विदाई कराई थी।  

जब तक चर्चा नहीं तब तक नहीं चलने देंगे संसद: तृणमूल

पेगासस फोन टैपिंग मामले ने देश में राजनीतिक तूफान ला रखा है। तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि यह एक संवेदनशील मामला है। पेगासस प्रकरण में फोन टैपिंग वाले नेताओं की सूची में टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी का भी नाम है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार चर्चा नहीं कराती, उनकी पार्टी के सांसद राज्यसभा और लोकसभा को चलने नहीं देंगे। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार को भी लोकसभा की कार्यवाही नहीं चल पाई।

पेगासस फोन टैपिंग मामले को लेकर सपा, बसपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। अखिलेश यादव और मायावती ने भी तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस ने सरकार की नैतिकता पर उठाया सवाल

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पेगासस फोन टैपिंग को लेकर सीधे केन्द्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा सांसद शशि थरूर ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी और मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी केन्द्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि यह तो एक राज्य सरकार (कर्नाटक) को गिराने के लिए किया गया था। सुरजेवाला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पर एक महिला ने आरोप लगाया था। सरकार यह आरोप लगाने वाली महिला और उसके परिवार के 11 सदस्यों का फोन सुन रही थी। सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा की कर्नाटक की सरकार न केवल असंवैधानिक ही नहीं बल्कि एक नाजायज सरकार है। सुरजेवाला ने कहा कि जिस दिन उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच होगी, कई ऐसे चेहरे सामने आ जाएंगे, जिन्होंने फोन टैपिंग का आदेश दिया था। ऐसा होने के बाद हम अपने कानूनी अधिकार का उपयोग करेंगे।
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