पेगासस फोन हैकिंग मामले में केंद्र सरकार के जवाब से विपक्षी नेता संतुष्ट नहीं हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार सच्चाई को छिपाकर बचना चाहती है। इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विन वैष्णव ने भी बयान दिया है, लेकिन विपक्ष के नेता वैष्णव के बयान से सहमत नहीं है। इस बीच भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा इशारा कर दिया है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि स्वामी का इशारा सरकार को समझना चाहिए।
सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि सरकार को संसद में बताना चाहिए कि जिस इस्राइली कंपनी ने भारत में फोन टैपिंग की है, उससे केन्द्र सरकार का कोई संबंध नहीं है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो अमेरिका के वाटरगेट कांड की तरह सच्चाई सामने आएगी और भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्वामी जो कह रहे हैं, विपक्ष को भी उसी का जवाब चाहिए। विपक्ष जानना चाहता है कि क्या केंद्र सरकार ने इस्राइल की कंपनी से कोई करार किया था? यदि किया था तो क्या था और इस्राइल की कंपनी ने क्या करार की शर्तों का कोई उल्लंघन किया है? विपक्ष जानना चाहता है कि आखिर इस्राइल की कंपनी ने किस अधिकार और व्यवस्था के तहत विपक्ष के भारतीय नेताओं, पत्रकारों समेत अन्य का फोन टैप किया? सनद रहे कि सुब्रमण्यम स्वामी ऐसे ही कोई सवाल नहीं उठाते।
फोन टैपिंग का मामला केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए विपक्ष के आरोपों की जद में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह हैं। अमित शाह के बहाने विपक्ष केन्द्र की मोदी सरकार को निशाने पर ले रहा है।