शीर्ष नौकरशाहों पर सीधा और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर परोक्ष निशाना साधने के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दी गई नसीहत के बाद भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के सुर बदले-बदले से दिखाई दिए। ट्वीट के जरिए सियासी घमासान मचाने वाले स्वामी ने पीएम मोदी की नसीहत के एक दिन बाद दार्शनिक अंदाज में गीता के उपदेश के सहारे सुख-दुख और दुनिया में संतुलन के सिद्धांत की बात की।
मंगलवार को उन्होंने ट्वीट के जरिए कहा कि दुनिया अपने सामान्य संतुलन की अवस्था में रहती है। किसी एक छोर पर किए गए छेड़छाड़ का असर चारों तरफ होता है। ऐसी सलाह गीता उपदेश में श्रीकृष्ण ने दी है।
स्वामी ने इसके साथ ही गीता का एक श्लोक साझा किया। जिसका अर्थ है सुख-दुख, लाभ-नुकसान और हार-जीत में अपने को सम रख कर युद्ध करो। इससे तुम पाप से बच सकते हो। गौरतलब है कि जेटली सहित शीर्ष नौकरशाहों पर हमले से चिंतित भाजपा नेतृत्व ने भी स्वामी को चुप रहने की हिदायत दी थी।
क्या वाकई मौन रहेंगे स्वामी?
भले ही स्वामी के मंगलवार के ट्वीट को उनके सुर बदलने से जोड़ कर देखा जा रहा है, मगर सच्चाई यह है कि चुप रहना उनके स्वभाव में नहीं है। पार्टी को अंदेशा है कि स्वामी देर सबेर फिर से नया विवाद खड़ा कर मुसीबत बढ़ा सकते हैं।
पीएम ने कहा था, कोई भी खुद को सिस्टम से ऊपर न समझे
सोमवार को एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा था कि रघुराम राजन किसी से कम देशभक्त नहीं हैं। जो लोग उनके खिलाफ बोलते हैं, उनके साथ नाइंसाफी करते हैं। उन्होंने स्वामी को साफ संदेश देते हुए कहा कोई भी शख्स खुद को सिस्टम से ऊपर न समझे।
पब्लिसिटी के शौक से किसी का भला नहीं होने वाला है। इससे पहले स्वामी ने राजन के साथ-साथ सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम की देशभक्ति पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा उन्होंने परोक्ष रूप से वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी निशाना साधा था।