फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक अदद दफ्तर के लिए तरस रहे हैं नेताजी के परपोते

Thu, 07 Apr 2016 04:22 AM IST
रीता तिवारी/ अमर उजाला, कोलकाता
विज्ञापन
चंद्र कुमार बोस
विज्ञापन
कोलकाता की भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस चुनावी दफ्तर खोलने के लिए किराए के एक मकान के लिए तरस रहे हैं।
विज्ञापन


तृणमूल कांग्रेस के कथित आतंक के चलते कोई भी उनको किराए पर जगह देने के लिए तैयार नहीं है। विडंबना यह है कि उसी इलाके में उनके पूर्वज नेताजी सुभाष बोस और शरत बोस भी रहते थे। नेताजी का पैतृक मकान भी इसी चुनाव क्षेत्र में है। बोस का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इलाके के मकान मालिकों को किराए पर जगह नहीं देने की धमकी दी है।

बोस और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता बीते कई दिनों से इलाके में कम से कम पांच सौ वर्ग फुट का एक दफ्तर तलाश रहे हैं, जहां से चुनाव प्रचार का संचालन किया जा सके। बोस कहते हैं कि उनको महज दो कमरे चाहिए, लेकिन हम महीने भर से इसकी तलाश कर रहे हैं।
विज्ञापन


हर मकान मालिक कहता है कि तृणमूल ने उनको मकान किराए पर देने की स्थिति में चुनाव बाद गंभीर नतीजा भुगतने की धमकी दी है। उनका आरोप है कि तृणमूल के लिए प्रतिष्ठित सीट होने की वजह से पार्टी के कार्यकर्ता यहां विपक्षी उम्मीदवारों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।
विज्ञापन

लोग मकान किराए पर देने को तैयार नहीं

भवानीपुर में भाजपा के मंडल अध्यक्ष और बोस के चुनाव एजेंट नितिन पटेल कहते हैं कि यह बेहद हैरत में डालने वाली बात है। उनका सवाल है कि क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि गांधी के परिजनों को पोरबंदर और भगत सिंह के परिजनों को पंजाब में किराए पर जगह नहीं मिलेगी?

भवानीपुर इलाके में नेताजी के तीन पैतृक मकान हैं। उनमें से एक संग्रहालय में बदल दिया गया है और दूसरे में नेताजी ओपन यूनिवर्सिटी चलती है। तीसरे मकान में नेताजी के परिजन रहते हैं, जबकि चंद्र बोस कुछ दूर रहते हैं। लेकिन वहां से चुनाव अभियान पर नजर रखने में मुश्किलें आ रही हैं।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका सवाल है कि आखिर इससे पार्टी को क्या फायदा होगा? नेताओं का दावा है कि यहां कोई भी मैदान में हो, ममता दीदी की जीत तो तय ही है। ऐसे में पार्टी किसी को मकान देने से मना क्यों करेगी?
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें