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लोकसभा: स्वच्छ भारत मिशन ने बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में अहम भूमिका निभाई, 70 हजार शिशुओं की बचाई गई जान

Fri, 29 Nov 2024 05:41 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देश में बच्चों की जीवन दर में सुधार के लिए वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (एपीआईपी) के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करता है।
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जेपी नड्डा - फोटो : ANI
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विस्तार
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इस साल नेचर मैगजीन में प्रकाशित एक लेख में बताया गया कि स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ने बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को संसद में इसकी जानकारी दी। लेख में बताया गया कि स्वच्छ भारत मिसन के जरिए 60,000 से 70,000 शिशुओं की जान बचाई गई है, जिससे देश भर में शिशू और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी देखने को मिली। 
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सैंपल रेजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसारएस) की एक रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 2014 में प्रति 1000 जीवित बच्चों पर  39 से घटकर 2020 में प्रति 1,000 जीवित बच्चों पर 24 हो गई है। तेलंगाना में मृत्यु दर 100 जीवित बच्चों पर 35 से घटकर 21 हो गया है। लोकसभा में एक सवाल का लिखित में जवाब देते हुए नड्डा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय देश में बच्चों की जीवन दर में सुधार के लिए वार्षिक कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (एपीआईपी) के आधार पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्रदान करता है।

मंत्री ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत नकद प्रोत्साहन के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेएसएसके) के तहत पात्रताएं, बीमार और छोटे शिशुओं की देखभाल के लिए नवजात गहन देखभाल इकाइयों (एनआईसीयू), विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) और नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना और बाल-पालन प्रथाओं में सुधार के लिए आशा कार्यकर्ताओं की ओर से छोटे बच्चों की घर-घर जाकर देखभाल प्रदान करना शामिल है। बच्चों में दस्त के प्रबंधन के लिए ओआरएस और जिंक के उपयोग को बढ़ावा देना, पहले छह महीनों के लिए विशेष स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए मदर्स एब्सोल्यूट अफेक्शन (एमएए) कार्यक्रम भी शामिल है। 
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