घातक अल नीनो के दौरान भी फले-फूले प्रवाल।
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अल नीनो प्रभाव को समुद्री जीवन के लिए चुनौती माना जाता है, लेकिन अमेरिकी द्वीप पलपायरा के पास मौजूद प्रवाल भित्तियां अल नीनो के दौरान भी फलती-फूलती रहीं। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ सांइस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि असल में अल नीनो के प्रभाव से इन्हें स्थानीय समुद्री धाराओं से खूब भोजन मिला, जिसकी वजह से जहां वैश्विक स्तर पर बहुत सारी प्रवाल भित्तियां मरने के कगार पर पहुंच गईं, वहीं 2015-16 के दौरान यहां प्रवाल भित्तियां जीवंत बनी रहीं।
अध्ययन हाल ही में साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता माइकल फॉक्स कहते हैं, यह आश्चर्यजनक है कि अल नीनो का समुद्री जीवन पर अनुकूल प्रभाव भी पड़ सकता है।
क्या हैं प्रवाल भित्तियां, क्यों अहम
प्रवाल (मूंगा) असल में जीव होते हैं, जो कैल्शियम कार्बोनेट उत्सर्जित करते हैं। कालांतर में यह चट्टानी रूप लेने लगते हैं। शैवाल (एल्गी) मछलियों का भोजन है। यह समुद्रों में प्रवालों के आसपास पनपते हैं। एक तरह से दोनों सहजीवी होते हैं। इसके अलावा प्रवाल भित्तियों में तमाम समुद्री जीव अपना घर बनाते हैं। इन्हें पृथ्वी पर सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले पारिस्थितिकी तंत्र कहा जाता है। इनके मरने या खत्म होने से समुद्री जीवन पर सीधा असर पड़ता है।