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Study: हर राज्य में एक जैसा नहीं हो रहा कैंसर का इलाज, गांव की अपेक्षा शहरों में ज्यादा जी रहे मरीज

Thu, 19 Oct 2023 07:22 AM IST
यशोधन शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक अध्ययन के जरिए किया है, जिसमें पता चला कि सर्वाइकल कैंसर की मरीज गांव की तुलना में शहर में ज्यादा समय तक जिंदगी जी रहे हैं।
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कैंसर से बचाता है अनानास - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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देश में कैंसर का इलाज हर जगह एक जैसा नहीं हो रहा है। यह खुलासा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक अध्ययन के जरिए किया है, जिसमें पता चला कि सर्वाइकल कैंसर की मरीज गांव की तुलना में शहर में ज्यादा समय तक जिंदगी जी रहे हैं। इसकी मुख्य वजह गांव, दुर्गम स्थान या फिर पहाड़ी राज्यों से ज्यादा शहरों में कैंसर उपचार के संसाधन होना है।

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द लैंसेट दक्षिण पूर्व मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन आईसीएमआर के अधीन बेंगलुरु के राष्ट्रीय रोग सूचना विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीडीआईआर) ने देश के 38 में से 11 कैंसर रजिस्ट्री के साथ किया है। साल 2012 से 2015 के बीच कुल 5,591 मरीजों को इसमें शामिल किया, जो केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, असम, मिजोरम, गुजरात और कर्नाटक के अस्पतालों में कैंसर ग्रस्त पाई गईं। 

एनसीडीआईआर के वरिष्ठ शोधकर्ता प्रो. कृष्णन सतीश कुमार ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर से ग्रसित मरीज कितने वर्ष तक जीवित रहती हैं? इसके बारे में जानकारी के लिए यह अध्ययन किया गया। 
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उन्होंने कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्षों से नीति निर्माताओं को स्वास्थ्य प्रणाली में असमानताओं की पहचान करने और उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी। साथ ही हम जागरूकता, कैंसर की शीघ्र जांच और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में सुधार पर फिर से जोर दे सकते हैं।

अहमदाबाद में जी रहीं सबसे ज्यादा
अध्ययन के अनुसार, भारत में 51.7 फीसदी मरीज सर्वाइकल कैंसर का पता लगने के बाद पांच साल तक जीवित रह रही हैं। हालांकि भौगोलिक आधार पर देखें तो कैंसर का इलाज और रोकथाम के तौर तरीके एक जैसे नहीं है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि गुजरात में सर्वाइकल कैंसर की मरीज ज्यादा समय तक जिंदगी जी पा रही हैं जबकि त्रिपुरा और पूर्वोत्तर राज्य में ऐसे लोगों की संख्या बेहद कम है। देश में सबसे ज्यादा 61.5 फीसदी मरीज अहमदाबाद में पांच साल तक जीवित रह पा रहे हैं जबकि त्रिपुरा में सबसे कम 31.6%, तिरुवनंतपुरम 58.8, कोल्लम 56.1, मुंबई 53.9, मणिपुर 43.6, पासीघाट 39 फीसदी है।

हर पांच में से चार लोग ग्रस्त
सर्वाइकल कैंसर की मुख्य वजह उच्च मानव पेपिलोमावायरस (एचपीवी) का प्रसार है। भारत में हर पांच में से चार मरीज इस वायरस से ग्रस्त हैं। हाल ही में इस कैंसर से बचने के लिए दिल्ली एम्स ने सफल टीका परीक्षण किया। सरकार भी किशोरी टीकाकरण पर जोर दे रही है।

मरीजों की संख्या और मरीजों की मौत दोनों के मामले में सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में चौथे स्थान पर है, जबकि भारत में यह दूसरे स्थान पर है। भारत में दूसरा सबसे आम महिला कैंसर है, जो सभी महिला कैंसर का 10% है।

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