हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। इस पर हमें गर्व होना चाहिए। लेकिन यूपीएससी की तैयारी कर रही देश की एक बेटी शिखा का कहना है कि अपने बच्चों को हिंदी माध्यम से कभी मत पढ़ाइये, क्योंकि अगर वह हिंदी माध्यम से पढ़ाई करता है तो जिंदगी में उसके आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे।
दिल्ली के मयूर विहार में रहकर हिंदी माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक की पढ़ाई कर चुकी 25 वर्षीय शिखा अब यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं। सीसैट के कारण उनके जैसे लाखों हिंदी माध्यम के छात्रों का भारी नुकसान हो चुका है। उन्हीं छात्रों को दोबारा मौका दिलाने के लिए रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन हुआ।
इस प्रदर्शन में भाग लेते हुए शिखा ने कहा कि सीसैट लागू करके हिंदी माध्यम के छात्रों को नुकसान पहुंचाया गया। इसमें प्रिलिम्स में अंग्रेजी पास करने की अनिवार्यता साल 2015 में हटाने के बावजूद लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। सिर्फ साल 2011 में परीक्षा में बैठे छात्रों को एक बार अतिरिक्त मौका दिया गया। जबकि साल 2012 से साल 2014 तक तीन प्रयास कर चुके छात्रों को अब दोबारा मौका नहीं मिल रहा है।
सामान्य वर्ग के छात्रों, जिन्हें पहले ही बहुत कम मौके मिलते हैं, वे अब दोबारा परीक्षा में नहीं बैठ सकते। इसीलिए अब शिखा जैसे लाखों छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार और यूपीएससी एक निर्णय लेकर इन छात्रों को परीक्षा में बैठने का मौका दे। वे प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके कई बार के प्रदर्शनों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।