क्या पश्चिम बंगाल में भाजपा बाबुल सुप्रियो को भूमिपुत्र (भावी मुख्यमंत्री का चेहरा) बनाएगी और उनके साथ तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए शुभेन्दु अधिकारी बड़ी भूमिका निभाएंगे? क्या पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद सरकार बनाने की स्थिति आने पर असम की तरह सर्बानंद सोनोवाल और हेमंत बिस्वा शर्मा का मॉडल अपनाया जाएगा? पश्चिम बंगाल भाजपा में इसकी चर्चा जोरों पर है। भाजपा के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तृणमूल के लोग भाजपा का चेहरा मांग रहे थे और अब पार्टी चेहरों को चुनाव में उतार रही है। तृणमूल के नेताओं की घबराहट बढ़ रही है तो हम क्या करें?
अचानक से सांसद के प्रत्याशी बनने पर यह चर्चा संभव
पश्चिम बंगाल महिला मोर्चा की प्रमुख अग्निमित्रा पॉल ने अमर उजाला से कहा कि बाबुल सुप्रियो को चुनाव में उतारने के बाद यह चर्चा हो सकती है, क्योंकि अचानक से ऐसा हो रहा है कि सांसद भी चुनाव लड़ेंगे। लेकिन इस बारे में हमें कुछ नहीं पता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला तो चुनाव के बाद ही होगा। इसे हमारे प्रधानमंत्री के मार्ग दर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता तय करेंगे। अभी हमारा मुख्य लक्ष्य सोनार बांग्ला बनाना, चुनाव में 200 से अधिक सीटें जीतना, बंगाल के लोगों में विकास और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए विश्वास पैदा करना है। अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि लोगों ने तृणमूल के शासन में प्रताड़ना झेली है और हमें उन्हें सम्मानजनक जीवन के रास्ते पर लाना है। इसी मुद्दे पर हम लोगों से वोट मांगने में व्यस्त हैं।
तृणमूल को पछाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे- कैलाश विजयवर्गीय
भाजपा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में अपनी सरकार चाहती है। उसके हाथ शुभेन्दु अधिकारी के रूप में बड़ा तुरुप का पत्ता लगा है। अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी भी तृणमूल के बड़े नेताओं में हैं। भाई दिव्येन्दु अधिकारी और पिता शिशिर दोनों लोकसभा सांसद हैं। क्षेत्र में इनका दबदबा रहता है। शुभेन्दु के भाजपा में शामिल होने के बाद जितेन्द्र तिवारी जैसे नेताओं ने भी भाजपा में आने में संकोच नहीं किया। अब भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय जीत का हर समीकरण खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
बताते हैं कि भाजपा के कुछ फैसलों ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष को भी भीतर से हैरान करना शुरू कर दिया है। वहीं पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष समेत घोष के प्रतिद्वंदी नेताओं की खुशी भी किसी बड़े बदलाव की तरफ बढ़ने का इशारा कर रही है। तृणमूल छोड़कर भाजपा में आए अर्जुन सिंह और उनकी टीम के नेता पार्टी को जी जान से सत्ता में लाने में जुटे हैं, लेकिन इसके साथ-साथ उनकी निगाह पार्टी के भीतर चल रही हलचल पर भी है।