इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटेटिवनेस (आईएफसी) ने 'द स्टेट ऑफ इनईक्वेलिटी इन इंडिया' रिपोर्ट जारी कर दी है। इसके मुताबिक, 2017-18 और 2018-19 के मुकाबले देश में 2019-20 में कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान देश में जहां कामगारों की संख्या में इजाफा हुआ है, वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था भी बेहतर हुई है। रिपोर्ट में कई तथ्यों को भी शामिल किया गया है।
लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट में हुई बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, देश में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी एलएफपीआर में 3.7% की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 में एलएफपीआर 49.8% था, जो 2019-20 में बढ़कर 53.5% हो गया। शिक्षित कामगारों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 और 2018-19 में सेकेंड्री या इससे अधिक शिक्षित कामगार 48.8% थे, जो 2019-20 में बढ़कर 51.5% हो गए। डिप्लोमा और सर्टिफिकेट प्राप्त कर चुके कामगारों की संख्या 70% पहुंच गई है। इसी तरह वर्कर पॉप्युलेशन रेशियो जो 2017-18 में 46.8% थी, वो 2019-20 में बढ़कर 50.9% हो गई हे।
स्कूलों के हालात भी बदल गए
रिपोर्ट के अनुसार, 2017-18 के मुकाबले 2019-20 में स्कूलों के हालात में भी काफी बदलाव हुए हैं। 2020 तक देश के 97.5% स्कूलों में पीने के लिए साफ पानी की व्यवस्था हो गई। 2017-18 में ऐसे स्कूलों की संख्या केवल 59% थी।
इसी तरह 83.11% स्कूल, 78.89% आंगनबाड़ी केंद्रों के शौचालय और वॉशरूम में पानी नल के जरिए पहुंचने लगा है। 95% स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों के लिए टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध हो गई है। यही नहीं, 2019-20 में देश के 83.3% स्कूलों में बिजली का कनेक्शन हो गया। 2012-13 में यह आंकड़ा केवल 54.6% था। इसके अलावा जेंडर प्रिटी इंडेक्स अब एक से अधिक हो गया है। मतलब स्कूलों में छात्र और छात्राओं की संख्या लगभग बराबर हो गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में क्या बदलाव हुए?
'द स्टेट ऑफ इनईक्वेलिटी इन इंडिया' रिपोर्ट में आयुष्मान भारत योजना की तारीफ की गई है। कहा गया है कि इस योजना के जरिए ज्यादातर लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 तक देश के गांवों में 1,55,404 सब सेंटर, 24,918 प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर, 5,183 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर बन चुके हैं। पुराने आंकड़ों को देखें तो 2005 तक देश के गांवों में 1,46,026 सब सेंटर, 23.236 प्राइमरी हेल्थ केयर सेंटर और 3,346 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर थे।
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और बच्चों की देखभाल के मामले में भी सुधार देखने को मिला है। 70% गर्भवती महिलाएं अब चेकअप कराने लगी हैं। 2015-16 में इनकी संख्या केवल 58.6% थी। इसके चलते मृत्यु दर में भी कमी आई है।