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जवाहर बाग: लाइन लगाकर होती थी रामवृक्ष के बाजार से खरीदारी, बच्चे करते थे सफाई

Sun, 12 Jun 2016 03:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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एक व्यक्ति को एक किलो से ज्यादा नहीं देते थे - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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रामवृक्ष ने मार्च के शुरुआत में जवाहर बाग में बाजार लगाकर सस्ता सामान बेचा था। इस बाजार में चीनी, मसाले, नमक, फल और सब्जियों के दाम अन्य जगह से काफी कम दामों में होती तो लाइन लगी रहती थी। हालांकि यहां शर्त थी कि किसी को भी एक बार में एक किलो से ज्यादा सामान या सब्जी नहीं दी जाएगी।
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रामवृक्ष पब्लिक को सिस्टम के खिलाफ भड़काने की पूरी साजिश रच रहा था। उसने पहले जगह-जगह पोस्टर लगाकर लोगों को समझाया कि खाद्य पदार्थ इतने महंगे नहीं हैं जितना सरकार बेच रही है। बाद में उसने मार्च में जवाहर बाग में पूरा बाजार ही सजा डाला। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते। जो भी सामान लेने आता था उसका बाकायदा नाम और पता लिखा जाता था।

स्थानीय निवासी भगवान सिंह, रामवीर सिंह, विमला देवी, उदयवीर सिंह निवासी चंदन वन ने बताया कि चीनी उस वक्त 25 रुपये किलो दी गई थी जबकि अंगूर चालीस रुपये किलो। बताया जाता है कि यहां बिकने वाला हर सामान मार्केट रेट से सस्ता था। ऐसे में यहां लाइन लगती। खास बात यह है कि करीब हफ्ते भर तक बाजार चलता रहा लेकिन प्रशासन ने फिर भी ध्यान नहीं दिया।
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जेल में मुलाकात पर भी पुलिस का पहरा

कन्नौज के वृद्ध से बेटे को मिलने से रोका, सिटी मजिस्ट्रेट को दिया प्रार्थना पत्र - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
मथुरा के जवाहर बाग कांड में जेल भेजे गए लोगों को परिवारीजनों से नहीं मिलने दिया जा रहा है। उनसे मुलाकात पर रोक लगा दी गई है। जेल प्रशासन लोगों को वापस लौटा रहा है।  बता दें, मथुरा के जवाहर बाग पर तीन हजार से ज्यादा लोगों ने रामवृक्ष यादव की अगुवाई में कब्जा जमा लिया था। दो जून को बाग को कब्जा मुक्त कराने के दौरान हिंसा में एसपी सिटी और एसओ समेत 28 लोगों की मौत हो गई थी। बवाल के मामले में 250 से ज्यादा कब्जाधारियों की गिरफ्तारी की गई थी।

कन्नौज के थाना तिरवा स्थित गांव क्षीछापुर निवासी 75 वर्षीय रामसेवक पुत्र मथुरा प्रसाद 27 मई को जय गुरुदेव आश्रम आए थे। कुछ लोग उन्हें जवाहर बाग ले गए थे। दो जून को हुई घटना के बाद से वह लापता थे। बेटा सोम नरायन अपने दोस्त आशु के साथ पिता की तलाश कर रहा था। नौ जून को पता चला कि रामसेवक जेल में बंद हैं। लिस्ट में उनका नाम 133 नंबर पर है। सोम ने शुक्रवार को जिला जेल पहुंचकर मुलाकात की पर्ची लगाई तो जेल कर्मियों ने मुलाकात कराने से इनकार कर दिया।

सोम नरायन ने सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की है। आशु का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया है कि रामसेवक को किस आरोप में बंद किया गया है। वह मानवाधिकार आयोग में शिकायत करेंगे। उधर, अधिवक्ता दुर्ग विजय सिंह भैया का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी उनके परिवारीजनों को दी जानी चाहिए। ( अमर उजाला, ब्यूरो आगरा से रिपोर्ट )
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काम से इनकार पर पेड़ से बांधकर पीटते थे गुर्गे

बच्चों की थी सफाई, बर्तन धोने व पानी लाने की जिम्मेदारी - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
जवाहर बाग में ढाई साल चली रामवृक्ष यादव की ‘आजाद हिंद सरकार’ में कब्जाधारियों को भी किसी तरह की आजादी नहीं थी। उसके या उसके गुर्गों के बहकावे में आकर जिसने भी जवाहर बाग में कदम रखा, फिर वह बाहर निकल नहीं आया। काम से इनकार या गलती करने पर वहां कब्जाधारियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था। पुरुषों को पेड़ों से बांधकर पीटा जाता। महिलाओं और बच्चों से काम से इनकार करने पर पीटा जाता। जिसकी पिटाई की जाती, उस पर सख्त निगरानी रखी जाती, ताकि वह भाग न जाए। उसे गेट के आसपास फटकने नहीं दिया जाता था।

मथुरा से एटा कारागार में शिफ्ट हुई महिला बंदियों ने ये खुलासे किए। बरेली निवासी माधुरी ने बताया कि खुली रसोई में खाना बनाने को लेकर आए दिन कहासुनी होती थी। जो महिला रसोई में सब्जी काटने अथवा आटा गूथने से इनकार करती, उसकी रामवृक्ष की करीबी महिलाएं और गुर्गे पिटाई करते। माधुरी ने बताया कि उसका पति घटनाक्रम वाले दिन जवाहर बाग से किसी प्रकार भाग निकला था लेकिन वह अपनी पांच साल की बच्ची के साथ वहीं फंसी रह गई। बदायूं निवासी कंचन ने बताया कि छोटी-छोटी बाल्टियों से जवाहर बाग के कोने में लगे नलों से बच्चों से बच्चों से पानी भरवाया जाता था।

वहीं खाना खाने के बाद झूठे बर्तनों को धोने की जिम्मेदारी भी बच्चों की ही होती थी। कंचन अपने भाई के साथ डेढ़ महीना पूर्व मथुरा घूमने आई थी और जवाहर बाग में फंसकर रह गई। कंचन का भाई मथुरा जेल में बंद हैं। बरेली निवासी धर्मवती ने बताया कि काम से इनकार करने पर रामवृक्ष के करीबी पुरुषों को पेड़ से बांधकर लाठियां से पीटते थे। वहीं बाग में जिस महिला अथवा पुरुष की पिटाई होती थी, उसे उस दिन बाग के गेट के आसपास जाने की इजाजत नहीं होती थी।

धर्मवती की मानें तो एक बार टीवी पर कार्यक्रम देख रहीं महिलाओं को रामवृक्ष ने डंडे मारकर भगाया और उसके बाद टीवी तोड़ दिया था। वह नहीं चाहता था कि देश दुनिया और बाग के बाहर क्या हो रहा है, किसी को पता चले।

( अमर उजाला, एटा से सुशील कुमार की रिपोर्ट )
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