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एक अपमान के बाद क्लाशनिकोव ने बनाई थी एके-47, फिर यही बनी मौत की वजह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 05 Mar 2019 04:08 PM IST
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mikhail kalashnikov - फोटो : social media

उत्तर प्रदेश के अमेठी में अब दुनिया की सबसे खतरनाक असॉल्ट राइफल एके-203 राइफल का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां कोरवा आयुध कारखाने का उद्घाटन किया है। इस कारखाने में हर साल 75 हजार एके-203 राइफल बनाई जाएंगी। यह एके-47 राइफल का सबसे उन्नत संस्करण है। नई राइफल एके-47 की तुलना में ज्यादा सटीक मार करेगी। एके-203 के बाद से ही क्लाशनिकोव नामक शख्स का नाम चर्चा में आ गया है।

ये वही शख्स हैं जिन्होंने एके-47 राइफल बनाई थी। इस राइफल का पूरा नाम ऑटोमैटिक क्लाशनिकोव 1947 है। क्लाशनिकोव 19 भाई बहनों में 17वें नंबर पर थे। इनका पूरा नाम मिखाइल तिमोफेयेविक क्लाशनिकोव है। क्लाशनिकोव का जन्म 10 नवंबर, 1919 को हुआ था। गरीबी के कारण छह साल की उम्र में उन्हें कई बीमारियों ने घेर लिया। जिसके बाद डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया। बाद में मुश्किल से उनकी जान बच सकी।

मशीनों से था बेहद प्यार

क्लाशनिकोव को बचपन से ही मशीनों से बेहद प्यार था। वह मशीन को देखकर ही खुश हो जाते थे, उसमें क्या है ये देखने के लिए उत्सुक रहते थे। यही कारण था कि 1938 में उन्हें रूस की रेड आर्मी में जगह मिल गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी लंबाई सेना में शामिल होने के लिए काफी नहीं थी। उनके मशीनों के प्रति प्रेम ने ही उन्हें सेना में जगह दिलवाई। उन्हें सेना में दुश्मन की स्थिति का पता लगाने वाले मशीन के नियंत्रण के लिए रख लिया गया। मशीनों के प्रति ज्ञान के कारण उन्हें कई बार इनाम भी मिल चुके हैं। वह सेना में रहते हुए टैंक कमांडर तक रह चुके हैं।

इस वजह से बनाई थी एके-47 राइफल

क्लाशनिकोव के एके-47 बनाने के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के समय टैंक का संचालन करते हुए वह जख्मी हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जब उनका इलाज चल रहा था तो वहां कुछ सैनिक भी मौजूद थे। वहां खड़े सैनिक सोवियत हथियारों की बुराई कर रहे थे। जिसे सुनकर मिखाइल क्लाशनिकोव को अपमानित महसूस हुआ। जिसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह रूस के सैनिकों के लिए ऐसे हथियार बनाएंगे जिससे वह अपने देश के लिए गर्व महसूस कर सकें।



फिर कुछ सालों बाद ही उन्होंने एके-47 राइफल बना ली। कड़ी मेहनत से बनी इस राइफल में कई बातों का ध्यान रखा गया। इसे रूसी सैनिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। रूसी सीमाओं पर काफी ठंड होती है, जिसके कारण सैनिकों को मोटे-मोटे दस्ताने पहनने पड़ते थे। जिसके चलते उन्हें बंदूकें चलाने में परेशानी आती थी। कई बार तो ऐसा भी होता था कि निशाना चूक जाता था और राइफल का ट्रिगर तक नहीं दबता था। यही कारण है कि एके-47 सिरीज की बंदूकों में ऐसी कई खूबियां हैं जिससे इसे बिना ट्रेनिंग लेने पर भी चलाया जा सकता है।

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mikhail kalashnikov - फोटो : social media
उत्तर प्रदेश के अमेठी में अब दुनिया की सबसे खतरनाक असॉल्ट राइफल एके-203 राइफल का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां कोरवा आयुध कारखाने का उद्घाटन किया है। इस कारखाने में हर साल 75 हजार एके-203 राइफल बनाई जाएंगी। यह एके-47 राइफल का सबसे उन्नत संस्करण है। नई राइफल एके-47 की तुलना में ज्यादा सटीक मार करेगी। एके-203 के बाद से ही क्लाशनिकोव नामक शख्स का नाम चर्चा में आ गया है।

ये वही शख्स हैं जिन्होंने एके-47 राइफल बनाई थी। इस राइफल का पूरा नाम ऑटोमैटिक क्लाशनिकोव 1947 है। क्लाशनिकोव 19 भाई बहनों में 17वें नंबर पर थे। इनका पूरा नाम मिखाइल तिमोफेयेविक क्लाशनिकोव है। क्लाशनिकोव का जन्म 10 नवंबर, 1919 को हुआ था। गरीबी के कारण छह साल की उम्र में उन्हें कई बीमारियों ने घेर लिया। जिसके बाद डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया। बाद में मुश्किल से उनकी जान बच सकी।

मशीनों से था बेहद प्यार

क्लाशनिकोव को बचपन से ही मशीनों से बेहद प्यार था। वह मशीन को देखकर ही खुश हो जाते थे, उसमें क्या है ये देखने के लिए उत्सुक रहते थे। यही कारण था कि 1938 में उन्हें रूस की रेड आर्मी में जगह मिल गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी लंबाई सेना में शामिल होने के लिए काफी नहीं थी। उनके मशीनों के प्रति प्रेम ने ही उन्हें सेना में जगह दिलवाई। उन्हें सेना में दुश्मन की स्थिति का पता लगाने वाले मशीन के नियंत्रण के लिए रख लिया गया। मशीनों के प्रति ज्ञान के कारण उन्हें कई बार इनाम भी मिल चुके हैं। वह सेना में रहते हुए टैंक कमांडर तक रह चुके हैं।

इस वजह से बनाई थी एके-47 राइफल

क्लाशनिकोव के एके-47 बनाने के पीछे भी एक कहानी है। दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के समय टैंक का संचालन करते हुए वह जख्मी हो गए। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। जब उनका इलाज चल रहा था तो वहां कुछ सैनिक भी मौजूद थे। वहां खड़े सैनिक सोवियत हथियारों की बुराई कर रहे थे। जिसे सुनकर मिखाइल क्लाशनिकोव को अपमानित महसूस हुआ। जिसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वह रूस के सैनिकों के लिए ऐसे हथियार बनाएंगे जिससे वह अपने देश के लिए गर्व महसूस कर सकें।

फिर कुछ सालों बाद ही उन्होंने एके-47 राइफल बना ली। कड़ी मेहनत से बनी इस राइफल में कई बातों का ध्यान रखा गया। इसे रूसी सैनिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था। रूसी सीमाओं पर काफी ठंड होती है, जिसके कारण सैनिकों को मोटे-मोटे दस्ताने पहनने पड़ते थे। जिसके चलते उन्हें बंदूकें चलाने में परेशानी आती थी। कई बार तो ऐसा भी होता था कि निशाना चूक जाता था और राइफल का ट्रिगर तक नहीं दबता था। यही कारण है कि एके-47 सिरीज की बंदूकों में ऐसी कई खूबियां हैं जिससे इसे बिना ट्रेनिंग लेने पर भी चलाया जा सकता है।

बड़े आविष्कारक थे क्लाशनिकोव

Mikhail Kalashnikov - फोटो : social media

रूसी सेना में जनरल के पद पर रह चुके क्लाशनिकोव एक आविष्कारक भी थे। सेना में रहते हुए ही उन्होंने राइफल का निर्माण करना शुरू कर दिया था। उन्होंने रेड आर्मी के तोपखाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने 1944 में गैस से चलने वाला 7.62*39एममए कार्टेज वाला हथियार बनाया था। जो एम-1 गैरंड राइफल से प्रेरित था। इसी दौरान एक अन्य आविष्कारक येरगेई गैवरिलोविक सिमोनोव ने सोवियत सेमी ऑटोमैटिक कार्बाइन का आविष्कार किया। जिससे एके-47 का रूप बनना शुरू हुआ।

1947 में एके-47 की पहली किस्त तैयार हो गई लेकिन इसे मान्यता नहीं मिल पाई। इसे क्लाशनिकोव ने और बेहतर किया। जिसके बाद 1949 में रूसी सेना ने उनकी राइफल का अनुभव किया और इसे भारी मात्रा में बनाने का आदेश दे दिया। सेना से सेवानिवृत होने के बाद क्लाशनिकोव ने राइफल बनाने की शिक्षा देना शुरू कर दिया। टेक्निकल साइंस में डॉक्टर की उपाधि लेने के बाद वह 16 से अधिक शिक्षण संस्थानों का हिस्सा बने।

राइफल ही बनी मौत की वजह

दिसंबर 2013 में लंबी बीमारी के चलते क्लाशनिकोव का निधन हो गया था। उन्होंने अपनी मौत से पहले एक लेख लिखा था, जिसे 2014 में एक अखबार ने छापा। इस लेख से पता चला कि वह मानसिक तौर पर स्वास्थ्य नहीं थे। उन्हें शारीरिक बीमारी भी थी। लेख से पता चला कि क्लाशनिकोव खुद को उन लोगों की मौत का जिम्मेदार मानने लगे थे, जिनकी हत्या उनके द्वारा बनाई गई राइफल से की गई थी।

उनके द्वारा बनाई गई एके-47 को सबसे ज्यादा तालिबान ने अफगानिस्तान में आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किया था। जिससे वह काफी परेशान हो गए थे। उन्होंने एक बयान में इसे लेकर अफसोस भी जताया था। क्लाशनिकोव के अलावा उनका पूरा परिवार भी हथियार बनाने में दिलचस्पी रखता था। उन्होंने दो बार शादी की थी। उनकी दूसरी पत्नी पेशे से इंजीनियर थी और राइफलों को डिजाइन करने में उनकी मदद करती थी। इसके अलावा उनका बेटा भी हथियार डिजाइन करता था।
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