गुलजार ने उनकी लिखी हर कविता को तवज्जो दी। गुलजार मानते थे कि मीना को इमेजरी की काफी समझ है। जो कि उनके लिखे में जीवंत हो उठती है। यही वजह थी कि मीना कुमारी अपनी तमाम निजी डायरियां गुलजार को सौंपकर दुनिया से विदा हो गईं। उनकी लिखी नज्मों और गजलों को गुलजार ने एक नई शक्ल दी। उन्होंने 'मीना कुमारी की शायरी' नामक किताब प्रकाशित करवाई। लेकिन डायरियों के उस जखीरे में से लिखा बहुत कुछ कहीं बंद करके रख दिया।
'मीना कुमारी: द क्लासिकल बायोग्राफी' किताब के लेखक दिवंगत पत्रकार विनोद मेहता बताते हैं कि गुलजार और मीना की मुलाकात बिमल रॉय की फिल्म बेनजीर (1964) के सेट पर हुई थी। गुलजार इस फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर थे। मीना को उनका साथ बहुत पसंद था। दोनों साथ बैठकर किताबों पर बातें करते। जब साथ न होते तो फोन पर गुफ्तगू होती। लेकिन इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान मीना और उनके पति का रिश्ता टूट गया। उनकी मौत 31 मार्च 1972 को मुंबई में हुई।