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मौत के अंधड़ में बुझ गई 149 जिंदगियां, मौसम विभाग की चेतावनी- फिर आएगा तूफान

Fri, 04 May 2018 03:51 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली/ लखनऊ
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यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व बंगाल में उठे बवंडर और तेज बारिश से भारी तबाही के साथ ही 149 लोगों की मौत हो गई। 400 से ज्यादा पशु भी मारे गए। 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी से यूपी में सर्वाधिक 92 लोगों की जानें गई व 90 घायल हुए। अकेले आगरा में 50 मौतें हुईं।

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कानपुर नगर व देहात में 5-5, मिर्जापुर में 4, बिजनौर, जालौन, उन्नाव में 3-3, सहारनपुर, हमीरपुर में दो-दो व बरेली, पीलीभीत, चित्रकूट, रायबरेली, रामपुर, मथुरा, अमरोहा, देवरिया, भदोही, कन्नोज,बांदा, सीतापुर,संभल, इलाहाबाद, इटावा में एक-एक की मौत हुई है। वहीं राजस्थान में 37, प. बंगाल में 8, उत्तराखंड में 6 व मप्र में 6 की मौत हुई।

राजस्थान सरकार ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये, 60 फीसदी घायलों को दो-दो लाख रुपये और 40-50 फीसदी घायलों को 60-60 हजार रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। 
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कोताही बर्दाश्त नहीं 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत रूप से राहत कार्यों की निगरानी करें और प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराएं। इस मामले में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

फिर आएगा तूफान

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पांच मई को उत्तर प्रदेश के ज्यादातर पूर्वी और पश्चिमी जिलों में बिजली की तेज गर्जन और बौछार के साथ तेज गति की हवाएं चल सकती हैं। वहीं राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में सात मई को धूल भरी आंधी और गर्जन की संभावना है। 

इसके अलावा मौसम विभाग की मानें तो चार, पांच और छह मई को उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी, पूर्वी राजस्थान सहित तटीय क्षेत्रों के अलग-अलग हिस्सों में गर्जन के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। 

शनिवार को यूपी के इन जिलों में आ सकती है आंधी 

शनिवार को गोरखपुर, बलिया, मऊ, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, सीतापुर, खीरी, शाहजहांपुर, पिलीभीत, रामपुर, बरेली, बदायूं, अलीगढ़, एटा, महामायानगर, मथुरा, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत जिलों में तेज गर्जना और आंधी के आसार हैं।

पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती हवा का क्षेत्र लाया भयानक बवंडर

सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है।

स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने यह जानकारी दी है। वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। 

वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक एक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 

100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक मृत्युंजय मोहपात्रा ने बताया कि दूसरे अर्थ में इसे समझें तो उत्तरी भारतीय मैदान में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ रहा है। 

वहीं उत्तरी पाकिस्तान व जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली पूर्वी हवाओं ने वातावरण में नमी पैदा की। पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंडी हवाओं ने गर्म वातावरण को अस्थिर किया। 
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इसलिए आती है आंधी

- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

निम्न दबाव का क्षेत्र

जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है।

पश्चिमी विक्षोभ

भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं। 
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