फिल्मों में भी हमने कभी इतना बेकाबू समंदर नहीं देखा था। तेज हवा ने हमें उड़ा दिया था। किसी तरह हम अपनी नाव को तब तक पकड़े रहे, जब तक बचाव दल नहीं आ गया। केरल में तूफान ओखी ms बचाए गए मछुआरे टाइटस ने ये बात कही।
पढ़ें: गोवंश खरीद-फरोख्त कानून में कोई बदलाव नहीं, मछली बाजार की बिक्री का कानून भी रद्द
टाइसन की तरह ही केरल में अब तक निकाले गए 400 मछुआरों ने भी तूफान का जो खौफनाक रूप बयां किया है, उससे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कन्याकुमारी के एक हजार मछुआरे अभी लापता हैं। तूफान का सबसे ज्यादा असर कन्याकुमारी में ही हुआ है। वहीं तमिलनाडु कई इलाकों और लक्ष्यद्वीप में भी काफी तबाही मची है।
दूसरे मछुआरे स्टीफन ने कहा, ऐसा पहली बार हुआ है जब समंदर में हमने इतनी तेज लहरों का सामना किया है। खुशकिस्मत रहे कि बचाव दल ने हमें निकाल लिया। मछुआरों के मुताबिक जब वे भयानक लहरों में फंसे तो उनके पास न पानी था और न खाना।
बेचैन आंखें मदद की तलाश कर रही थीं। हम सब असहाय हो चुके थे। हवा 100 किलोमीटर की रफ्तार से चल रही थी। लहरें नाव और जिंदगी से खेल रही थीं। ऐसा नहीं है कि केरल के मछुआरों ने पहली बार उफनता समंदर देखा है, लेकिन पहली बार इतने मछुआरे फंसे और तूफान ओखी ने उन्हें हिला दिया है।
पढ़ें: बीजेपी सांसद मीनाक्षी बोलीं- शिवभक्त राहुल गांधी भगवान राम पर अपना रुख स्पष्ट करें
नौसेना, वायुसेना और कोस्ट गार्ड उन्हें बचाने के लिए संयुक्त अभियान छेड़े हुए हैं। कई मछुआरे सुरक्षित निकाले जा चुके हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पर उनमें से कई उफनते समंदर को देखकर इतने डरे हुए हैं कि अब तक सदमे से निकल नहीं पाए हैं। ज्यादातर मछुआरों के पूरे शरीर पर चोट के निशान हैं। बचाव दल जब उनके पास पहुंचा तो सभी बुरी तरह कांप रहे थे और गर्म पानी के लिए गिड़गिड़ा रहे थे।