एचसीएल के महाप्रबंधक विनय कुमार सिंह ने बताया कि तांबा के खुले खनन में यह पत्थर निकला है। मौजूदा समय नदियों से बजरी और रेत के खनन पर विभिन्न राज्यों में रोक है। ऐसे में सरकारी महकमों, खासतौर पर रेलवे और सड़क निर्माण विभाग के लिए निर्माण सामग्री को सही कीमत पर जुटाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में पत्थर को सरकारी महकमों को बेचने की हमारी पहल देश के विकास में साथ देने की है।
निजी क्षेत्र भी इस ओर देख रहा है, लेकिन एचसीएल ने रेलवे को यह सामग्री बेचने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एचसीएल ने खुले में खनन के बाद जमीन के भीतर खनन की शुरुआत मध्य प्रदेश के मलाजखंड में कर दी है। हमारे देश में तांबा बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है और एचसीएल 5 से 7 फीसदी तांबा देश को मुहैया कराता है, जो सबसे बेहतर गुणवत्ता का होता है।
रेलवे बिछाएगा अपनी लाइन
एचसीएल के सूत्रों के मुताबिक, रेलवे अपनी एक लाइन मलाजखंड तक पहुंचाने की तैयारी में है, ताकि वह एचसीएल के खनन के बाद शेष रहने वाली सामग्री का पूरा उपयोग कर सके। साथ ही एचसीएल को भी इससे लाभ होगा, क्योंकि वह आसानी से खनन क्षेत्र से तांबा निर्धारित स्थान तक पहुंचा सकेगा। गौरतलब है कि खनन में पत्थर लगातार निकलता रहता है। ऐसे में एचसीएल तमाम सरकारी महकमों की जरूरत पूरी करने में सक्षम है।