13 फरवरी 2017 को कोरोनरी स्टेंट की कीमत 85 फीसदी तक कम करने के दो वर्ष बाद इनकी कीमतों में करीब 10 फीसदी तक का उछाल देखने को मिला है। सरकार ने एक बार फिर स्टेंट की अधिकतम कीमत में बदलाव किया है, जिसके कारण अब स्टेंट सोमवार से करीब 2 हजार रुपये महंगी कीमत पर उपलब्ध होगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने सभी स्टेंट निर्माता कंपनियों के साथ बैठक के बाद स्टेंट की नई कीमतें तय कर थोड़ी राहत जरूर दी है। बताया जा रहा है कि सरकार लंबे समय से विदेशी कंपनियों का दबाव झेल रही है। नियमानुसार करीब 10 फीसदी की बढ़त कंपनियों को राहत दे सकती है।
दिल की धमनियों में ब्लॉकेज को दूर करने के लिए कोरोनरी स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है। एंजियोप्लास्टि प्रक्रिया के तहत डॉक्टर स्टेंट डालता है। ज्यादात्तर डीईएस स्टेंट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इन स्टेंट का इस्तेमाल आर्टरी यानि धमनियों के कमजोर पडने पर भी किया जाता है। ताकि इनकी मदद से रक्त प्रवाह में मदद मिल सके। जिन स्टेंट पर दवाओं का लेपन नहीं होता है, उन्हें बीएमएस कहते हैं। डॉक्टरों के अनुसार भारत में डीईएस और बीएमएस स्टेंट का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है।
एनपीपीए के अनुसार दवा छोड़ने वाले स्टेंट यानि डीईएस की नई कीमत में 2190 और बीएमएस स्टेंट पर करीब 601 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। डीईएस स्टेंट की कीमत 27,890 से बढ़ाकर 30,080 रुपये की गई है। जबकि बेयर मेटल स्टेंट (बीएमएस) की कीमत 7660 से बढ़ाकर 8261 रुपये कर दी गई है। 1 अप्रैल 2019 से ये नई कीमतें लागू होंगी।
इससे पहले और 85 फीसदी कीमतें तय करने के ठीक एक साल बाद 13 फरवरी 2018 को केंद्र सरकार ने डीईएस स्टेंट की कीमत में 1710 रुपये की कटौती करते हुए 29600 से 27,890 रुपये की अधिकतम कीमत तय की थी। साथ ही बीएमएस स्टेंट की कीमत में 400 रुपये की बढ़ोत्तरी करते हुए 7260 से 7660 तय किया था। ये कीमतें 31 मार्च 2019 तक ही लागू थीं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि ये आदेश बताता है कि लगातार तीसरी बार केंद्र सरकार अपने फैसले पर अडिग है। हालांकि 10 फीसदी कीमत बढ़ोत्तरी सालाना का नियम है, जिसका एनपीपीए ने ध्यान रखा है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार का ये प्रयास जनता और स्टेंट निर्माता कंपनियों दोनों के लिए ही राहत भरा है।