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स्वदेशी किट से एंटीबॉडी जांच की राज्यों को छूट, महज आधा घंटा में चलेगा संक्रमित का पता

Sun, 31 May 2020 07:11 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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देश के किन इलाकों में कोरोना वायरस का फैलाव ज्यादा हुआ है, इसकी पुख्ता जानकारी अब हर राज्य के पास होगी। इस जानलेवा महामारी से ज्यादा प्रभावित राज्यों को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने स्वदेशी किट से एंटीबॉडी जांच के जरिये सर्वे कराने की सलाह दी है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉयरोलॉजी (एनआईवी) द्वारा तैयार यह एंटीबॉडी जांच किट महज आधे घंटे में ही पॉजिटिव-नेगेटिव की जानकारी दे रही है।

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दरअसल आईसीएमआर ने हाल ही में देश के 21 राज्यों के 69 जिले में एंटीबॉडी जांच के जरिए ही एक सर्वे पूरा किया है। इसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन शनिवार को आईसीएमआर ने सभी राज्यों को अपने अपने यहां सीरो सर्वे करने की सलाह जारी कर दी है। एनआईवी किट्स के जरिए राज्य कंटेनमेंट जोन या अन्य जगहों पर लोगों की जांच करते हुए वायरस के फैलाव का पता लगा सकता है।

आईसीएमआर ने सीरो सर्वे को लेकर अलग से विस्तृत दिशा निर्देश भी राज्यों को जारी कर दिए हैं। आईसीएमआर के अनुसार यह सीरो सर्वे संबंधित राज्य में स्वास्थ्य हस्तक्षेप को लेकर मार्गदर्शन करेगा। साथ ही यह भी बता सकेगा कि राज्य में किस स्तर पर वायरस का फैलाव है। किन क्षेत्रों में फैलाव है और उन्हें लेकर भविष्य की रणनीति तैयार करने में सरकार को मदद मिल सकेगी।
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 क्या है एंटीबॉडी टेस्ट और क्यों है चर्चा

  • किसी व्यक्ति को कोरोना वायरस होने पर शरीर उससे लड़ने के लिए एंटीबॉडी बनाता है
  • शरीर में एंटीबॉडी के निर्माण में करीब सात से 10 दिन तक का समय लगता है
  • खून की जांच में एंटीबॉडी मिलने पर सैंपल वाले व्यक्ति के संक्रमित होने का पता लग जाता है
  • अब तक आरटी-पीसीआर टेस्ट से कोरोना वायरस की जांच में 2 से 3 घंटे लैब में लग रहे थे
  • आरटी-पीसीआर टेस्ट में गले या नाक से सैंपल लेकर उससे आरएनए अलग करके जांच होती है

 चीनी एंटीबॉडी किट पर हो चुका है हंगामा
मार्च में भी एंटीबॉडी जांच चालू की गई थी, लेकिन तब घटिया किट के चलते यह कवायद फेल हो गई थी। किट सप्लाई करने वाली दो चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाया गया था। साथ ही देश में एंटीबॉडी जांच पर रोक लगा दी गई थी। अब आईसीएमआर ने किट्स पर अध्ययन करने और इनका उत्पादन शुरू कराने के बाद राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए हैं। एनआईवी की किट का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कराने के लिए करीब आधा दर्जन कंपनियों से करार किया गया है।

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