एक ओर देश जहां हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी से उद्वेलित है, वहीं महिला सुरक्षा को बनाए गए ‘निर्भया फंड’ को राज्यों ने खर्च तक नहीं किया है। 2011 में राजधानी दिल्ली में चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद केंद्र सरकार ने महिला सुरक्षा को लेकर निर्भया फंड बनाया था। लोकसभा में शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने निर्भया फंड के खर्च का ब्योरा दिया।
इसके अनुसार, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा के अलावा दमन और दीव सरकारों ने केंद्र द्वारा दिए निर्भया फंड से एक भी पैसा खर्च नहीं किया, वहीं उत्तर प्रदेश ने 119 करोड़ रुपये में से केवल छह करोड़ रुपये खर्च किए। तेलंगाना ने 103 करोड़ रुपये में से केवल चार करोड़ खर्च किए। आंध्र प्रदेश ने 21 करोड़ में 12 करोड़ बचाए तो बिहार ने 22 करोड़ में से 16 करोड़ बचा लिए।
देशभर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 20 ने ही महिला हेल्पलाइन बनाने में पैसे खर्च किए हैं। हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और गोवा जैसे राज्यों को महिला हेल्पलाइन के लिए दिए पैसे जस के तस पड़े हैं।
यहां तक कि दिल्ली सरकार ने इस मद में मिले 50 लाख रुपये में से एक भी पैसा खर्च नहीं किया। जबकि निर्भया मामले को लेकर आठ साल पहले सबसे बड़ा आंदोलन अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों ने किया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत आंध्र प्रदेश को दिए 58.64 करोड़ रुपयों में से एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया। जबकि केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा 11 राज्यों को दिए फंड में से किसी भी राज्य ने एक पैसा खर्च नहीं किया। इसी तरह केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने जिन 12 राज्यों को फंड दिए उनमें से 8 राज्यों ने उस पैसे का कोई इस्तेमाल नहीं किया। केवल आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और हरियाणा ने ही फंड का कुछ इस्तेमाल किया है।