किसी भी देश का विकास उसमें रहने वाली महिलाओं के उत्थान के बिना पूरा नहीं हो सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो महिलाओं के विकास के बिना किसी घर, राज्य या देश के विकास की संभावना ही नहीं होती है। इसी वजह से केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार भी उनके विकास के लिए कुछ योजनाएं बनाती है ताकि बेटियों और महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिलाने का अवसर मिल सके। 69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हम आपको बताते हैं देशभर में चल रही ऐसी ही कुछ योजनाओं के बारे में।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम- इस कार्यक्रम की शुरुआत हरियाणा से की गई थी क्योंकि यहां पुरुषों और महिलाओं की संख्या में काफी अंतर है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य लिंग के आधर पर भेदभाव रोकने और हर एक बच्ची को शिक्षा प्रदान करना है।
किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना- यह कार्यक्रम महिला एवं बाल मंत्रालय चलाता है। यह कार्यक्रम भारत के 200 जिलों में 11-18 साल की किशोरियों की देखभाल आती है। इसके तहत किशोरियों को खाना, आयरन की गोलियां दी जाती हैं।
इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना- इस कार्यक्रम का उद्देश्य 19 साल या उससे ज्यादा उम्र की स्तनपान कराने वाली महिलाओं को दो बच्चों के जन्म तक आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत माताओं को 6,000 रुपए की राशि प्रदान की जाती है।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना- इस योजना के तहत जिन ग्रामीण इलाको में महिला साक्षरता की दर कम है वहां राज्य सरकारे 75 और 25 प्रतिशत योगदान देती हैं। इस योजना के जरिए अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की बालिकाओं का स्कूल में दाखिला करवाना शामिल है।
भाग्यश्री योजना- इस योजना के तहत गरीब परिवार में जन्मी हर बच्ची के खाते में सरकार 21,000 रुपए जमा करवाएगी। इसके बाद बच्ची के 18 साल पूरे होने पर उसे एक लाख रुपए दिए जाएंगे।
कन्या विवाह योजना- इस योजना में मिलने वाले लाभ और राशि हर राज्य में अलग है। अमूमन इस योजना के तहत बीपीएल परिवार के युवक-युवतियों को शादी के लिए 15,000 रुपए जबकि 10,000 रुपए का चेक और गृहस्थी का सामान दिया जाता है। इस योजना के तहत विधवा और परित्याग की हुई महिला को 30,000 रुपए मिलते हैं।