कहने को तो कर्नाटक में विधानसभा के लिए वोट डाले गए लेकिन प्रचार के दौरान ऐसा लगा जैसे यह 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल हो। अपनी सम्मोहक भाषण शैली से मतदाताओं को भाजपा की ओर खींचने में सिद्धहस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नए आत्मविश्वास से भरपूर राहुल गांधी के बीच जमकर जुबानी जंग हुई और खूब जुमले उछाले गए। पेश है एक नजर:
दिल और डील
pm modi
प्रधानमंत्री ने 6 मई को चित्रदुर्ग से चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि दलितों के नाम पर कांग्रेस देश को गुमराह कर रही है। उसे न तो ‘दिल’ की परवाह है और न ही ‘दलितों’ की बल्कि उसे तो सिर्फ ‘डील’ की चिंता है।
सीधा रुपैया सरकार
PM MODI
- फोटो : self
दावणगेरे में मोदी ने सिद्धारमैया सरकार पर निशाना साधते हुए इसे सीधा रुपैया सरकार करार दिया और कहा कि कर्नाटक में सब कुछ पैसे के लिए हो रहा है।
टू प्लस वन
PM Modi Karnataka Rally
मोदी ने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री खुद दो सीटों पर लड़ रहे हैं और बेटे को भी एक सीट से उतार दिया है यानी यह टू प्लस वन की व्यवस्था है। इसके जवाब में राहुल ने कहा कि हकीकत में भाजपा में टू प्लस वन की व्यवस्था चल रही है जिसके तहत दो रेड्डी (खनन घोटाले वाले रेड्डी बंधु) और एक येद्दी चुनाव लड़ रहे हैं।
पंद्रह मिनट की चुनौती
Rahul Gandhi
राहुल ने अपने चुनाव क्षेत्र अमेठी में कहा कि अगर उन्हें संसद में बोलने का मौका दिया जाए तो प्रधानमंत्री उनके सामने पंद्रह मिनट भी नहीं टिक पाएंगे। इसके जवाब में मोदी ने कहा कि बिना कागज देखे राहुल पंद्रह मिनट तक कर्नाटक सरकार की उपलब्धियां गिनाकर बताएं। वे चाहें तो अपनी मां की मातृभाषा सहित किसी भी भाषा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
नामदार बनाम कामदार
rahul gandhi
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ‘नामदार’ हैं, इसलिए वे ‘कामदार’ लोगों द्वारा की जा रहे कार्यों को समझ ही नहीं सकते हैं।
दबंग बाल्टी वाला
Karnataka PM Modi
बांगरपेट और चिकमगलूर में मोदी ने राहुल द्वारा प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताए जाने पर तंज कसते हुए कहा कि एक दबंग नामदार ने कतार तोड़ कर अपनी बाल्टी आगे रख दी है। उन्हें न तो कांग्रेस की परंपरा का ख्याल है और न ही देश के लोकतंत्र का।
असली मुद्दे गायब ः
Karnataka Election 2018
चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के सामने खड़े असली मुद्दे पर्दे के पीछे चले गए। इस दौरान महादयी और कावेरी नदियों के जल के बंटवारे का मामला, रोजगार, सड़क, पेयजल एवं बिजली से जुड़े स्थानीय मुद्दों को कोई तरजीह ही नहीं दी गई। इसके बजाय भावनात्मक मुद्दों को उछालने की कोशिश की गई।
- कांग्रेस ने केंद्र पर उत्तरी राज्यों को तरजीह देने और दक्षिण के राज्यों से भेदभाव का आरोप लगाया।
- कांग्रेस ने भाषा, संस्कृति, विचारधारा के आधार पर राज्य को कम आर्थिक मदद का आरोप लगाया।
- लिंगायत को धार्मिक आरक्षण का प्रस्ताव रख भाजपा के परंपरागत वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश की।
- महिला सुरक्षा, दलित उत्पीड़न, रोजगार, किसानों के मुद्दों पर कांग्रेस ने भाजपा की केंद्र सरकार को घेर्रा।
- राफेल, नीरव मोदी, विजय माल्या के बहाने केंद्र की मोदी सरकार पर राहुल गांधी ने खूब किए हमले।