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जवानों की शहादत राशि में राज्य सरकारें न करें कोई भेदभाव, लिखा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र

Wed, 24 Jun 2020 08:21 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार या राज्य सरकारें जब एक खिलाड़ी को पदक जीतने की एवज में तीन से पांच करोड़ रुपये तक दे रही हैं, तो इस तर्ज पर शहीदों की सम्मान राशि क्यों नहीं बढ़ाई जा सकती...
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शहीद संतोष बाबू को दिया गया गॉर्ड ऑफ ऑनर - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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कंफेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जवानों की शहादत राशि को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें पीएम से अपील की गई है कि देश के लिए जान देने वाले शहीदों के सम्मान में जो राशि दी जा रही है, उसमें भेदभाव न किया जाए।

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शहीद जवानों के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की नीति में अंतर नहीं होना चाहिए। किसी राज्य में शहीद को पांच करोड़ रुपये मिल रहे हैं, तो दूसरे राज्य में वह राशि पांच या दस लाख रुपये पर सिमट जाती है।

जब गोली यह नहीं देखती कि सामने सीना किसका है, जवान कहां का रहने वाला है तो फिर राज्यों को भी शहीदों के परिवार को दी जाने वाली शहादत राशि को लेकर कोई भेदभाव नहीं बरतना चाहिए।
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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने इस पत्र में लिखा है कि पिछले 40-50 सालों के दौरान देश के अंदरूनी हिस्सों में कानून व्यवस्था को बनाए रखने एवं सरहदों की सुरक्षा के लिए हजारों की संख्या में जवानों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया है।

इनमें सेना व अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं। राज्यों की पुलिस ने भी अपना योगदान दिया है। कश्मीर में प्रॉक्सी वॉर हो या फिर नक्सल प्रभावित राज्यों में शहीद हुए जवान, ताड़मेटला-चिंतलनार जहां 76 सीआरपीएफ के जवानों ने अपनी शहादत दी या फिर पुलवामा के 40 शहीद।

हाल ही में गलवां घाटी में सरहद पर सेना के बीस जवान शहीद हो गए हैं। आजादी से लेकर आज तक 34 हजार जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। हाल ही में शहीद हुए कर्नल के परिवार को तेलंगाना सरकार 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि, रिहायशी प्लॉट एवं ग्रुप ए की नौकरी सम्मान के तौर पर देने की घोषणा कर देती है।

तेलंगाना सरकार का यह फैसला सराहनीय है। दूसरे राज्यों की तरफ से दी गई सम्मान राशि की तुलना करें तो कहीं पांच लाख, कहीं दस, बीस या पचास लाख रुपये दिए गए हैं। दो राज्य दिल्ली व मध्यप्रदेश में यह सहायता राशि एक करोड़ रुपये की गई है।
 

कई बार शहादत की सम्मान राशि वितरित करते वक्त रैंक को तवज्जो दी जाती है। पिछले दिनों कश्मीर के हंदवाड़ा में शहीद हुए राष्ट्रीय राइफल्स के कर्नल आशुतोष के परिवार को उत्तरप्रदेश सरकार की तरफ से पचास लाख रुपये दिए गए।

दूसरी तरफ उसी एनकाउंटर में शहीद हुए नायक राजेश कुमार को पंजाब सरकार ने मात्र दस लाख रुपये दिए हैं। गलवां घाटी में शहीद हुए सेना के बीस जवानों के साथ भी इस तरह का भेदभाव कई राज्यों में देखने को मिला है।

केंद्र सरकार या राज्य सरकारें जब एक खिलाड़ी को पदक जीतने की एवज में तीन से पांच करोड़ रुपये तक दे रही हैं, तो इस तर्ज पर शहीदों की सम्मान राशि क्यों नहीं बढ़ाई जा सकती।

सभी राज्य सरकारें भी देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद बांकुरों के परिवारों को तेलंगाना सरकार की तर्ज पर 5 करोड़ रुपये की सहायता सम्मान राशि, आवास एवं नौकरी देने की घोषणा करें।

शहादत राशि में भेदभाव न बरता जाए। सेना एवं अर्धसैनिक बलों के शहीद परिवारों को दी जाने वाली राशि व दूसरी सुविधाओं को लेकर केंद्र एवं राज्य स्तर पर एक जैसी नीति बनाई जाए। राष्ट्रीय शहीद सुरक्षा कोष की स्थापना की जाए। केंद्र सरकार, इस बाबत राज्य सरकारों को दिशा निर्देश जारी करे।

 
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