लाटरी खरीदने के चस्के ने भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत एक सीनियर मैनेजर को बैंक में रखे दस दस रुपये के सिक्के चुराने पर मजबूर कर दिया। वह हर महीने कम से कम पांच लाख रुपये के सिक्के चुरा लेता था और उनसे लाटरियां खरीदता था। पुलिस के मुताबिक, लगभग 17 महीनों तक उसने यह काम जारी रखा और लगभग 84 लाख रुपये बैंक से चुराए।
पिछले 27 नवंबर को बैंक खातों की सालाना आडिट में यह चोरी पकड़ी गई जिसके बाद आरोपी को पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया गया। एक स्थानीय अदालत ने शनिवार को उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया। पुलिस ने बताया कि 35 वर्षीय तारक जायसवाल पिछले आठ साल से स्टेट बैंक में कार्यरत था। बीते 17 महीनों से वह बर्दवान जिले में स्टेट बैंक की मेमारी शाखा में तैनात था।
आरोपी रोजाना दो हजार सिक्के यानी 20 हजार रुपये चुराकर अपने साथ ले जाता था। ऑडिट में पकड़े जाने के बाद बैंक प्रबंधन की ओर से पुलिस में मामले की शिकायत की गई। पूर्व बर्दवान जिले के पुलिस अधीक्षक भास्कर मुखर्जी ने बताया कि जायसवाल ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। आरोपी ने बताया कि पूरी रकम उसने लाटरी की टिकटें खरीदने पर खर्च कर दी। फिलहाल, यह पता लगाया जा रहा है कि बैंक में कोई जायसवाल का सहयोगी तो नहीं था।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी कहा कि वह जानता था कि एक न एक दिन वह जरूर पकड़ा जाएगा। बावजूद, लाटरी के चस्के के कारण उसने चोरी जारी रखी। पुलिस का कहना है कि बैंक शाखा प्रबंधक से भी पूछा जाएगा कि आखिर इतनी ज्यादा मात्रा में रखे गए सिक्कों को आरबीआई को क्यों नहीं भेजा गया था।