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'क्या एक बार अप्पा कह लूं? स्टालिन ने दिवंगत पिता करुणानिधि के याद में लिखी कविता

Wed, 08 Aug 2018 10:41 AM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क,अमर उजाला
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तमिलनाडू के पटकथा लेखक के नाम से मशहूर दिग्गज नेता एम करुणानिधि के निधन से राज्य शोक में डूबा हुआ है। इस शोक में करुणानिधि के बेटे एम के स्टालिन अपने दायित्वों को निभाते हुए एक पुत्र के रूप में पिता को हर पल याद कर रहे हैं। करूणानिधि के उत्तराधिकारी,पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष स्टालिन ने पिता की याद में एक कविता लिखी है और इजाजत मांगी है ' क्या मैं आपको अप्पा कह लूं?'  पिता को समर्पित इस कविता को बेटे स्टालिन ने ट्वीटर पर साझा किया।

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जहां करुणानिधि के निधन से उनके सभी प्रशंसक बेकाबू हो रहे हैं वहीं उनके बेटे स्टालिन भी अपनी भावुकता को छुपा नहीं पाये।इस लिए नेता और कार्यकर्ता की भूमिका से ऊपर उठ कर दिवंगत पिता से कविता के शब्दों में दिल की बात कही जिसे पढ़ लोग भी भावुक हो गये।

स्टालिन ने लिखा है- ' आप जहां भी जाते थे, उस जगह के बारे में मुझे जरूर बताते थे। अब मुझे बिना बताये कहां चले गए? आप हमें लड़खड़ाता छोड़ कहां चले गए? 33 साल पहले आपने बताया था कि आपकी स्मृति में क्या लिखा जाना चाहिए : 'यहां वो शक्स लेटा है जिसने सारी जिंदगी बिना थके काम किया ' क्या अब आपने तय कर लिया है कि आप तमिल समाज के लिए काम कर चुके हैं? या क्या आप कहीं छिप कर देख रहे हैं कि क्या कोई आपके 80 साल के सामाजिक जीवन की उपलब्धियों को पीछे छोड़ सकता है? 3 जून को अपने जन्मदिन पर मैंने आपसे आपकी क्षमता का आधा मांगा था, क्या अब आप अरिग्नार अन्ना से मिले? अपने दिल को भी मुझे देंगे? क्योंकि उस बड़े दान से हम आपके आधूरे सपनों और आदर्शों को पूरा करेंगे।'
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कविता के आखिर में स्टालिन ने करुणा को एक आखिरी बार 'पिता' कहने की इजाजत मांगी, तो जिसने भी इसे पढ़ा उसकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने लिखा- 'करोड़ों उडनपिरपुक्कलों (डीएमके काडर) की ओर से मैं आपसे अपील करता हूं कि बस एक बार 'उडनपिरप्पे' बोल दीजिए और हम एक सदी तक काम करते रहेंगे। मैं आपको अप्पा कहने की जगह अपने जीवन में ज्यादातर समय 'थलाइवर' (नेता) कहता रहा। क्या कम से कम अब मैं आपको अप्पा कह सकता हूं?' 
अपने पिता को हमेशा अपना राजनैतिक गुरु समझने वाले स्टालिन उन्हे पिता की जगह थलाइवर कहते थे , शायद ये कसक उन्हे हद से ज्यादा सता रही है। स्टालिन को अब पिता की आखिरी यात्रा को पूरी करनी है पर चिरनिद्रा में जा चुके करुणानिधि अपने बेटे की बिनती सुन रहे होंगे और एक पिता 'अप्पा' की तरह आशीर्वाद दे रहे होंगे।
 
बता दें कि मंगलवार देर शाम को चेन्नै के कावेरी हॉस्पिटल ने करुणानिधि के निधन की घोषणा की गई थी। हॉस्पिटल ने बताया था कि करुणानिधि का शाम 6:10 पर निधन हो गया। द्रविड़ आंदोलन की उपज एम करुणानिधि अपने करीब 6 दशकों के राजनीतिक करियर में ज्यादातर समय राज्य की सियासत का एक ध्रुव बने रहे। वह 50 साल तक अपनी पार्टी डीएमके के प्रेसिडेंट रहे।उनके बाद उनकी राजनातिक विरासत उनके बेटे स्टालिन संभालेंगे।

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