एसएससी जीडी 2018 के लाखों आवेदक 12 नवंबर को दिल्ली पहुंच रहे हैं। कन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन का दावा है कि ये सभी आवेदक बापू की समाधि राजघाट पर काली दिवाली मनाएंगे। ये सभी वे आवेदक हैं, जिन्होंने 2018 में एसएससी के जरिए विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भर्ती होने के लिए आवेदन दिया था। अभी तक इस परीक्षा का परिणाम जारी नहीं किया गया है।
एसोसिएशन के मुताबिक, करीब 85 आवेदकों का मेडिकल भी हो चुका है, लेकिन उसके बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका। 12 नवंबर को ये सभी आवेदक राजघाट पर धरना देंगे और उसके बाद राष्ट्रपति को ज्ञापन देने के लिए विजय चौक की तरफ कूच करेंगे।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह के अनुसार, केंद्र सरकार के मंत्री और विपक्षी दल चुनाव में युवाओं से लुभावने वादे करते हैं। हर बार यही होता है। इस दफा भी हो रहा है। बिहार का चुनाव इसका ताजा उदाहरण है। वहां सत्तापक्ष और विपक्ष लाखों नौकरियां देने की घोषणाएं कर रहे हैं।
यह बात कोई भी नहीं कर रहा कि 85 हजार मेडिकल फिट युवा, जिन्होंने स्टाफ सलेक्शन कमीशन के तहत अर्धसैनिक बलों में सिपाहियो के पदों पर 2018 में फार्म भरें थे, उन्हें तीन साल बाद भी नियुक्ति पत्र क्यों नहीं मिला।सरकार कहती है कि अर्धसैनिक बलों में एक लाख से ज्यादा रिक्तियां हैं। एसएससी ने साठ हजार वैकेंसी निकाली थी। लाखों युवाओं ने आवेदन दिया था।उन्हीं में 85 हजार का मेडिकल भी हो गया है।
युवाओं की मांग है कि अब 25 हजार पदों की संख्या बढ़ाकर सभी मेडिकल पास आवेदकों को नियुक्ति पत्र दे दिया जाए। रणबीर सिंह बताते हैं कि सरहदों पर तनातनी के माहौल को देखते हुए तुरंत प्रभाव से दिवाली के शुभ अवसर पर सरकार की ओर से 85 हजार मेडिकली फिट युवाओं को नियुक्त पत्र जारी करना चाहिए।
इससे देश की लम्बी सरहदों की चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। वैसे भी अब अधिकांश आवेदक, जो सिपाही बनने का सपना संजोय बैठे थे, उनकी उम्र निकल गई है। वे दूसरा चांस नहीं ले सकते। ये बताया जाए कि इसका जिम्मेदार कौन है।