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ट्रंप युग में भारतीयों को लग रहा 'डर', खुद को घरों में किया कैद

Fri, 24 Feb 2017 03:27 PM IST
अमित कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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डोनल्ड ट्रंप - फोटो : WWE
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अमेरिकी में राष्ट्रपति चुनावों के दौरान जब डोनाल्ड ट्रंप 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा दे रहे थे तब शायद ही किसी को इस बात का इल्म रहा होगा कि कुछ दिन बाद ही दुनियाभर का बाहें फैलाकर स्वागत करने वाला ये उदार देश उनके लिए एक डरावना सपना हो जाएगा। दरअसल जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तभी से वहां रह रहे अप्रवासियों के अंदर भय का माहौल है। ट्रंप ने अभी हाल ही में सात मुस्लिम बाहुल्य देशों के नागरिकों पर अमेरिका में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध लगाया था, जिसके बाद से पूरी दुनिया में उनको लेकर दहशत का माहौल है।
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दरअसल ट्रंप अपने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान 'अमेरिका पहले' का नारा देते रहे। राष्ट्रपति पद संभालते ही ट्रंप ने अपनी इस 'कथनी' को 'करनी' में बदलना शुरू कर दिया। भारतीयों के लिहाज से सबसे ज्यादा चिंता का विषय एच-1बी वीजा है। एक सच यह भी है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अप्रवासियों पर हमले तेज हुए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इन हमलों में किसी धर्म विशेष के व्यक्ति को नहीं बल्कि वहां बसे विदेशियों को निशाना बनाया जा रहा है।

हालांकि ऐसा भी नहीं है कि अमेरिका में इससे पहले विदेशी नागरिकों पर हमले नहीं हुए हैं, लेकिन अब एकाएक इस तरह के हमलों और वारदातों की संख्या बढ़ गई है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका में मौजूद विदेशी कंपनियां पहले अमेरिकी नागरिकों को जॉब पर रखें। क्योंकि पिछले काफी समय से अमेरिका में भी बेरोजगारी बढ़ी है। अमेरिकी लोग इस बेरोजगारी का कारण विदेशी नागरिकों को मानते हैं। एक सत्य यह भी है कि अमेरिका में इन विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या बहुत ज्यादा है।
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अमेरिकियों को लगता है कि यह लोग उनकी नौकरी छीन रहे हैं। शायद यही एक सबसे बड़ा कारण है कि भारतीयों पर अमेरिका में हमले तेज हुए हैं। इसका ताजा उदाहरण गुरुवार को अमेरिका के केन्सास शहर में भारतीय इंजीनियर पर हुआ एक नस्लीय हमला है। इस हमले में भारतीय इंजीनियर की मौत हो गई तो वहीं एक अन्य गंभीर रूप से घायल हुआ।

गौर करने वाली बात यह है कि वारदात के दौरान हमलावर लगातार यही चिल्ला रहा था कि 'मेरे देश से निकल जाओ'। ट्रंप युग में लोगों के भय का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मृतक इंजीनियर के परिजनों ने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को ही जिम्मेदार ठहरा दिया है संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की कुल जनसंख्या में 14.3 फीसदी प्रवासी हैं।
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किसी भी अपराध में फंसा सकते हैं अमेरिकी!

अमेरिका में पिछले कुछ समय से अप्रवासी अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। दरअसल अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने का नया फरमान सुनाने के बाद बिना दस्तावेजों के यहां रह रहे करोड़ों लोग बुरी तरह से डर गए हैं। वे न तो चर्च जा रहे हैं, न किसी स्टोर में शॉपिंग को जा रहे हैं, न डॉक्टरों से मिल रहे हैं और न ही वाहन चला रहे हैं। कई जगह अप्रवासी घरों में कैद हो गए हैं, ताकि कहीं उन पर कोई आरोप लगाकर देशनिकाला न दे दिया जाए।

इन अवैध प्रवासियों में लाखों भारतीय भी शामिल हैं। नए आदेश में अवैध प्रवासियों को आशंका है कि सार्वजनिक स्थलों पर उन्हें किसी भी तरह के अपराध में फंसाकर फौरन अमेरिका से निकालने की कार्रवाई की जा सकती है। अमेरिका में इस मसय ऐसा माहौल है कि लोग छोटी से छोटी गलती करने पर देश निकासी का डर सता रहा है। लोगों में डर है कि उन्हें किसी वाहन की टेल लाइट तक टूटी मिलने पर अपराध में फंसाया जा सकता है।

कैलिफोर्निया की सेंट्रल वैली में मजदूरी के लिए बिना दस्तावेज के अप्रवासियों को लिया जा रहा है लेकिन ये अप्रवासी अपने बच्चों को स्कूल से छोड़ने के बजाय घर पर ही छोड़कर आए हैं।  कमोबेश यही हालत पश्चिमी फोनिक्स और उत्तरी न्यू जर्सी में भी हैं जहां बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं। हालांकि अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों के लिए निर्वासन का खतरा हमेशा से बना रहा है लेकिन ट्रंप प्रशासन के नए कानून में तब तक उनके निर्वासन या देशनिकाले का खतरा नहीं है जब तक अप्रवासी किसी गंभीर अपराध में शामिल नहीं पाए जाएं।

फिर भी अप्रवासी इस बात से डरे हुए हैं कि सरकार द्वारा उन्हें देश के बाहर करने के लिए कानून को किसी भी तरह से तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है। इस डर से लॉस एंजेलिस में कई लोगों ने खुद को अपने घरों में बंद कर लिया है।

करीब 12 वर्ष पहले अल सल्वाडोर से यहां आई 37 वर्षीय मिली ने वाहन चलाना बंद करके खुद को घर में कैद कर लिया है। उसका बेटा ऑस्टिस्टिक रोग से पीड़ित है लेकिन वह डॉक्टर तक से नहीं मिल पा रही है।

उसने बताया कि सरकार के लोग हमें हर जगह पर ढूंढ रहे हैं, वे हमें पकड़ने के लिए हर जगह खड़े हैं। उनकी ही तरह और भी कई लोगों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है और उन्हें उम्मीद है कि संभवतया जल्द कोई राह निकलेगी।
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