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Sri Lanka: खाद्य संकट से जूझ रहा श्रीलंका, राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने सभी से मांगा समर्थन

Sat, 31 Dec 2022 07:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

देश में करीब चालीस फीसदी परिवार कृषि पर निर्भर हैं। प्रत्येक दस में दो घरों को जून से दिसंबर 2022 तक आय में कमी का सामना करना पड़ा है। आय में कमी के कारण प्रत्येक दो घरों में एक को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा।
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श्रीलंका में खाद्य असुरक्षा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुद्रा संकट ने श्रीलंका में गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक उथल-पुथल मचाई है। मुद्रा की कीमत में गिरावट के कारण पिछले दो वर्षों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में सौ फीसदी का इजाफा हुआ है।  इस बीच, श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने समर्थन मांगा है। स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी है।

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स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब चालीस फीसदी परिवार कृषि पर निर्भर हैं। प्रत्येक दस में दो घरों को जून से दिसंबर 2022 तक आय में कमी का सामना करना पड़ा है। आय में कमी के कारण प्रत्येक दो घरों में एक को भोजन की कमी का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, लोग वेतन और आय में कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे भोजन का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। इसमें आगे कहा गया कि श्रीलंका को मुद्रा संकट से उबरने में करीब दो साल लग सकते हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है, किसानों को तत्काल गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने की कार्रवाई करनी होगी ताकि वे अपनी आजीविका की रक्षा करने और अपने समुदायों को खाना खिलाने में सक्षम हों सके। किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को नकद सहायता प्रदान करना भी जरूरी है, ताकि वे अपनी उत्पादक संपत्ति को बहाल कर सकें और उनकी वसूली में तेजी ला सकें। 
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इसमें कहा गया कि 2021 के मध्य से कृषि उत्पादन में गिरावट देखी गई। देश उर्वरकों और अन्य आवश्यक उत्पादन सामग्रियों की बड़ी कमी का सामना कर रहा है। पशुपालकों की भोजन और बुनियादी पशु चिकित्सा आपूर्ति तक पहुंच नहीं है। मछुआरे मोटर चालित नावों के लिए ईंधन का उपयोग नहीं कर रहे हैं। 

रिपोर्ट में राष्ट्रपति विक्रमसिंघे के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने इस साल 16 दिसंबर को सभी से राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर समर्थन करने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी को अपने मतभेदों को भुलाकर देश की अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए खुद को समर्पित करना चाहिए।

उन्होंने कहा, वर्ष 2023 में खाद्यान्न की कमी की संभावना है। उससे निपटने के लिए हमने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम शुरू किया है। मेरा सुझाव है कि प्रत्येक संभागीय सचिवालय में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन की पुन: समीक्षा की जाए। यहां आ नया डेटा प्राप्त कर सके हैं। हम औपचारिक रूप से खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह कार्यक्रम 2023 के बाद भी समाप्त नहीं होगा। हम ऐसा करना जारी रखेंगे। 

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