पीएम मोदी ने तत्कालीन केंद्र सरकार को लेकर क्या कहा?
पीएम मोदी सभागार में मौजूद छात्रों से कहा कि तब आपकी जगह आपके सीनियर बैठे थे। मैं उस समय मुख्यमंत्री तो था, ही साथ ही देश की मुख्य विपक्षी पार्टी का सदस्य भी था। संभवतः हर कोई यही उम्मीद कर रहा था कि मैं तत्कालीन केंद्र सरकार पर जमकर हमले करूंगा और आरोपों की झड़ी लगा दूंगा। लेकिन साथियों, विपक्ष में होने और तत्कालीन सरकार का आलोचक होने के बावजूद मैंने इस मंच का इस्तेमाल उस तरह से नहीं किया।
पीएम मोदी ने कहा कि मैंने यहां एक विजन रखा और सकारात्मक बातें कीं। उस दिन मैंने जो कुछ भी कहा, वह मेरा दृढ़ विश्वास था। मैं उन विचारों और सपनों को हमेशा से जीता आया हूं और लगातार उसी रास्ते पर चलता रहा हूं। देश के लिए पूरी निष्ठा से जुटना और देश के लिए जीने का जज़्बा, जो मेरा अंतर्निहित भाव है, वही भाव 2013 में इसी मंच से शब्दों की माला में पिरोकर प्रकट हुआ था।
पीएम मोदी ने पानी के ग्लास का क्या उदाहण दिया?
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि मैं काफी देर तक बोला था। मैंने पूछा भी था कि क्या मैं अपनी बात जारी रखूं? तब उन्होंने कहा था, हां, जारी रखिए। उस दिन मैंने पानी के गिलास का एक उदाहरण दिया था, जिसकी पूरे देश में काफी चर्चा भी हुई थी। मैंने बताया था कि गिलास में रखे पानी को देखने के तीन नज़रिए होते हैं। पहला- जिन्हें गिलास आधा भरा दिखता है; दूसरा-जिन्हें गिलास आधा खाली दिखता है; और तीसरा-जिन्हें गिलास पूरा भरा हुआ दिखाई देता है, आधा पानी से और आधा हवा से।
प्रधानमंत्री ने कहा कि साथियों, वह एक ऐसा दौर था जब देश निराशा के दलदल में धंसा हुआ था। मैंने तब भी कहा था कि मैं गिलास को आधा-अधूरा नहीं देखता, बल्कि उसे पूरा भरा हुआ देखता हूं, आधा पानी से और आधा हवा से। उस समय आप लोग स्कूल में रहे होंगे, लेकिन आज अगर आप इंटरनेट पर जाकर 2013 और उसके आसपास की खबरें पढ़ेंगे, तो आपको अंदाजा होगा कि तब स्थितियां कैसी थीं। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप 2013 के उस कालखंड की अखबारों और टीवी चैनलों की सुर्खियों पर एक बार नज़र जरूर डालें। आज जो गैंग है न, मैंने जो कहा है उसके टुकड़े-टुकड़े कर के डाल देगी। उस समय के कालखंड में मीडिया में छाया रहता था:-
तब देश की आर्थिक वृद्धि दर फर्श पर थी और महंगाई अर्श पर: पीएम मोदी
शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं कह सकता हूं कि आज के विद्यार्थियों को उस दौर के बारे में शायद अंदाजा भी नहीं होगा। तब देश की आर्थिक वृद्धि दर (ग्रोथ) फर्श पर थी और महंगाई अर्श पर। घोटाले चरम पर थे और भ्रष्टाचारी बेखौफ घूम रहे थे। दुनिया भारत की गिनती दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं ('फ्रेजाइल-5') में कर रही थी। पाकिस्तान और आतंकी बेकाबू थे; चारों तरफ निराशा और हताशा के सिवा कुछ नहीं था। साथियों, एक वह दौर था जब देश हर मोर्चे पर सिर्फ संघर्ष ही कर रहा था, और एक आज का दिन है, जब आतंक फैलाने वाले पूरी तरह पस्त पड़े हैं।
'7.8 प्रतिशत की तिमाही विकास दर ने पूरे देश का जोश बढ़ा दिया'
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अभी एक ही हफ्ते के भीतर भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर कई सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। 7.8 प्रतिशत की तिमाही विकास दर ने पूरे देश का जोश बढ़ा दिया है। वहीं, जापान की रेटिंग एजेंसी ने भी भारत की क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर दिया है। जीडीपी की यह शानदार ग्रोथ ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा हुआ है और वैश्विक व्यापार में तमाम चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में यह विकास दर भारत के बढ़ते सामर्थ्य को दर्शाती है। मैं जानता हूं कि जिन लोगों की वजह से भारत कभी 'फ्रेजाइल-5' में धकेला गया था, उन्हें ये आंकड़े हजम नहीं हो रहे हैं। आप सभी इन आंकड़ों की गहराई को अच्छी तरह समझते हैं, अप्रैल से जून के बीच बिजली उत्पादन में नौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जबकि गाड़ियों की बिक्री 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है। इसका सीधा मतलब है कि देश में उपभोक्ता और व्यापारिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा, स्टील और सीमेंट की खपत में भी आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो यह साबित करती है कि भारत न सिर्फ तेज़ी से तरक्की कर रहा है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
गिलास जिनके लिए आधा खाली था, उनकी सोच आज भी वैसी: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने संबोधन के दौरान कहा कि 2013 में गिलास जिनके लिए आधा खाली था, उनकी सोच आज भी वैसी ही है; उनके लिए गिलास हमेशा आधा खाली ही रहेगा। उस समय एसआरसीसी के मंच से मैंने P2G2 यानी 'प्रो-पीपल, गुड गवर्नेंस' (जन-केंद्रित सुशासन) की चर्चा की थी। जिन लोगों ने देश में लंबे समय तक शासन किया, उनकी कार्यशैली थी-'जब आग लगे तभी नींद से जागो' और 'जब प्यास लगे तभी कुआं खोदो'। मैंने इसी सोच को बदलने का प्रयास किया और 2014 के बाद इसे अमल में लाकर भी दिखाया।
पीएम मोदी बोले- बीते 12 वर्षों में 60 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए
पीएम मोदी ने आगे कहा कि हाल ही में जनधन योजना के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। आज भले ही आप लोग फिनटेक के आधुनिक दौर में जी रहे हैं, लेकिन 2013 तक गांव-देहात और दूर-दराज के लोगों को एक बचत खाता (सेविंग्स अकाउंट) खुलवाने के लिए भी एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ता था। जो लोग बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थे, उनमें अधिकांश मजदूर, महिलाएं और छात्र शामिल थे। इसी स्थिति को बदलने के लिए हम जनधन योजना लेकर आए। बीते 12 वर्षों में 60 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए, जिससे आज देश का लगभग हर परिवार बैंकिंग प्रणाली से जुड़ चुका है। यही बदलाव भारत में फिनटेक क्रांति की मजबूत नींव बना। आप उन लोगों की सोच पर विचार कीजिए जो करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने तक का विरोध कर रहे थे, क्योंकि उन्हें आम जनता को अपने आगे-पीछे घुमाने में ही आनंद आता था। वे वर्षों से इसी 'माई-बाप' कल्चर को बढ़ावा दे रहे थे, लेकिन यह मोदी है- जो इस 'माई-बाप' संस्कृति के सामने एक मजबूत चट्टान बनकर खड़ा है।
सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज कभी टिक नहीं सकती: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मैं आपके पास अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आया हूं। मैं अच्छी तरह जानता हूं कि सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज कभी टिक नहीं सकती। 2013 के इसी कार्यक्रम में जब मैंने कहा था कि हमें 'मेड इन इंडिया' पर काम करना है, तब उस इकोसिस्टम के लोगों को यह बात समझ में ही नहीं आई थी। उन्हें लगा कि निराशा के उस दौर में 'मेड इन इंडिया' जैसी चीज़ संभव ही नहीं होगी। वे लोग आज भी 'मेड इन इंडिया' का मजाक उड़ाते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं छोटे लक्ष्य लेकर चलने वाला इंसान नहीं हूं; मैं हमेशा बड़े लक्ष्य तय करता हूं और उन्हें पूरा करने के लिए जी-जान लगा देता हूं। पहले भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए ज्यादातर सामान बाहर से खरीदा जाता था। यहां तक कि थलसेना, वायुसेना और नौसेना को छोटे-छोटे उपकरणों के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़ता था। हमने ऐसे सामानों की एक सूची बनाई और भारतीय कंपनियों से कहा कि वे इन्हें देश में ही बनाएं। आज भारत का रक्षा उत्पादन इतिहास के सबसे उच्चतम स्तर (ऑल टाइम हाई) पर पहुंच गया है और देश में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन हो रहा है। 2013 तक जहां हम महज़ 600-700 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात करते थे, वहीं आज भारत 40 हजार करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है।
देश ने ऐसे तमाम नाराज 'फूफाओं' को करारा जवाब दिया: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि हम 140 करोड़ देशवासी मिलकर भारत को विकसित और आत्मनिर्भर बनाकर रहेंगे। आने वाले समय में भारत मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन का भी बड़ा हब बनेगा। भारत कृषि निर्यात (एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट) की सुपरपावर बनेगा और अपना स्पेस स्टेशन भी स्थापित करेगा। आप वह दिन भी देखेंगे जब भारत एक ऐसे ओलंपिक का आयोजन करेगा कि पूरी दुनिया देखती रह जाएगी। यह केवल बातें नहीं हैं, बल्कि हमारे दृढ़ संकल्प हैं और इन्हें सिद्धि तक पहुंचाने के लिए देश में लगातार काम हो रहा है। अभी तो आपकी जिंदगी एसआरसीसी के माहौल में बीत रही है। चाय और कोल्ड कॉफी पर होने वाली चर्चाएं, एग्जाम के समय नोट्स और प्रिंटआउट्स के लिए भागदौड़। आप सभी ने यहां के हर पल को अपनी जिंदगी का हसीन हिस्सा बनाया है। लेकिन इस कैंपस से बाहर निकलते ही आपको एक नई दुनिया मिलेगी, जहां दो तरह के लोग होंगे, एक वे जो सकारात्मक सोच के साथ समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलते हैं, और दूसरी प्रजाति उन लोगों की है जो हर नए काम की शुरुआत पर 'नाराजा फूफा' बन जाते हैं। उनका काम ही विरोध करना होता है और उनका एक ही घिसा-पिटा डायलॉग होता है, 'इसकी क्या जरूरत है?'
उन्होंने कहा कि जब हम दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) बना रहे थे, तब इन 'फूफाजी' ने कहा था-'इसकी क्या ज़रूरत है?' जब हमने मेट्रो, यूपीआई, सेमीकंडक्टर चिप और संसद की नई इमारत का निर्माण शुरू किया, तब भी इनका यही सवाल था-'इसकी क्या ज़रूरत है?' यहां तक कि जब हमने अपने देश के वीर जवानों के लिए नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया, तब भी उन्होंने यही पूछा-'इसकी क्या ज़रूरत है?' लेकिन देश ने ऐसे तमाम 'फूफाओं' को करारा जवाब दिया है। जो काम देश के हित में और देश के लिए ज़रूरी है, उसे पूरा करने से भारत को अब कोई रोक नहीं सकता।