पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के सेक्रेटरी जनरल सौरभ सान्याल ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना की तीसरी लहर आने और इसके कारण होने वाले नुकसान की आशंका को लेकर अभी भी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। इसके बाद भी, तेज वैक्सीनेशन से संक्रमण दर में कमी लाकर कोरोना की तीसरी लहर को आने से रोका जा सकता है। देश में जिस गति से वैक्सीनेशन कार्यक्रम चल रहा है, अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर तक हम देश की बड़ी आबादी को वैक्सीन दे चुके होंगे। भारी वैक्सीनेशन से अगर कोरोना की तीसरी लहर आती भी है तो इसका असर बहुत सीमित होगा।
सौरभ सान्याल ने कहा कि कोरोना संक्रमण की दर लगातार कम हो रही है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन मिलते जाने से यह और कम होती जायेगी। इससे देश के अनेक हिस्सों में लॉकडाउन को कमजोर किया जायेगा। इससे आर्थिक गतिविधियां ज्यादा तेजी से खुलेंगी और देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर पटरी पर दौड़ने लगेगी। केंद्र सरकार से लेकर औद्योगिक संगठन इसको लेकर लगातार जागरूक हैं।
पहले अनुमान लगाया गया था कि देश वित्त वर्ष 2021-22 में 12 फीसदी तक जीडीपी ग्रोथ हासिल कर सकता है। लेकिन देश के अनेक हिस्सों में लॉकडाउन लगने से इसमें कमी आई है। अब जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, देश नौ फीसदी के आसपास की जीडीपी वृद्धि की विकास दर हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश के लिए यह वृद्धि दर भी संतोषजनक कही जा सकती है।
जागरूकता का भी लाभ
देश को केवल वैक्सीनेशन का ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि लोगों में इसके प्रति आई जागरूकता भी देश को बड़ा लाभ पहुंचाएगी। पहली लहर में देश ज्यादा आशंकित था जिसके कारण जनहानि ज्यादा नहीं होने पाई, लेकिन दूसरी लहर में लोग ज्यादा लापरवाह हो गये। यही कारण है कि दूसरी लहर में देश को भारी जनहानि का सामना करना पड़ा।
लेकिन अब लोग इसकी आक्रामकता के प्रति ज्यादा सतर्क हैं। लोग समझ रहे हैं कि उनकी लापरवाही की कितनी भारी कीमत उन्हें चुकानी पड़ सकती है। कंपनियों में कामकाज करने वाली जगहों पर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। श्रमिकों के रहने से लेकर काम करने तक की सभी जगहों पर संक्रमण से बचने के उपाय ज्यादा कारगर तरीके से लागू किये जा रहे हैं। देश को इन सभी परिस्थितियों का लाभ मिल सकता है।
लॉकडाउन का असर
पहले लॉकडाउन से देश ने बहुत कुछ सीखा है। यही कारण है कि इस बार देशव्यापी लॉकडाउन की बजाय सीमित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं को छूट देते हुए लॉकडाउन लगाया गया है। इससे पेट्रोल-डीजल, मेडिकल क्षेत्र और परिवहन के कई साधन चल रहे हैं। आवश्यक गतिविधियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन भी जारी है। इससे अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है और देश को इसका लाभ मिल रहा है।