भारत राष्ट्र समिति के नेता के. कविता ने अपने अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को एक पत्र लिखा। आमतौर पर एक बेटी का अपने पिता को पत्र लिखा सामान्य सी बात है, लेकिन इस स्थिति ने तेलंगाना की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया। कहा जा रहा है कि कविता ने केसीआर को एक हस्तलिखित फीडबैक पत्र लिखा था। इसमें पार्टी की हालिया बैठक को लेकर फायदेमंद और नुकसानदायक पहलुओं को उजागर किया गया था। इसमें भाजपा और बीआरएस के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों का भी जिक्र था। अब इस पत्र लीक होने से तेलंगाना के राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
बीआरएस एमएलसी ने क्या कहा?
इस बीच बीआरएस एमएलसी श्रवण दासोजू ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि कविता ने वर्तमान में पत्र लिखा है या नहीं। भले ही उन्होंने इसे लिखा हो, लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि पत्र प्रतिक्रिया था। उन्होंने कहा कि बेटी की ओर से पिता को या नेता की ओर से सर्वोच्च नेता को दिया जाने वाला यह एक बहुत ही सामान्य फीडबैक है। यह पत्र लोगों से मिले फीडबैक को एकत्र करने और आगे बढ़ाने जैसा है। भाजपा और कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कि पत्र पार्टी में आंतरिक दरार का संकेत देता है? दासोजू ने कहा कि धान खरीद और बेरोजगारी जैसे अन्य मुद्दे भी हैं, जो लोगों के लिए अधिक प्रासंगिक हैं।
सत्तारूढ़ कांग्रेस का रुख, बीआरएस और भाजपा के बीच मौन सहमति को उजागर
कविता के कथित पत्र के बारे में बोलते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस विधायक बीरला इलैया यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कविता ने स्वीकार किया है कि केसीआर ने अपने भाषण में अल्पसंख्यकों और उर्दू भाषा को नजरअंदाज किया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसा करके उन्होंने बीआरएस और भाजपा के बीच मौन सहमति को उजागर किया है। इलैया यादव ने संवाददाताओं से पूछा, 'पिछली बीआरएस सरकार के दौरान पिछड़े वर्गों, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों की अनदेखी किए जाने पर कविता चुप क्यों रहीं?'
भाजपा ने क्या कहा?
इस बीच विधानसभा में भाजपा के नेता ए. महेश्वर रेड्डी ने एक वीडियो बयान में दावा किया कि कविता का पत्र केसीआर के परिवार के भीतर गलत तरीके से अर्जित धन और सत्ता के वितरण को लेकर विवाद का परिणाम है।