राज्यसभा ने विशिष्ट राहत संशोधन विधेयक 2018 पास कर दिया है। इसके अलावा प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थलों और अवशेष संशोधन विधेयक 2018 को सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है।
केंद्र सरकार का दावा है कि विशिष्ट राहत संशोधन बिल हर इनफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर लागू होगा। यह बदलते भारत की जरूरत के मुताबिक है। विशिष्ट राहत संशोधन विधेयक को लोकसभा में मार्च में पारित कर दिया गया था।
राज्यसभा में संशोधन विधेयक के पास होने के बाद अब ठेकेदारों की मनमानी पर रोक लग सकेगी। इसमें किसी कार्य को समय पर पूरा करने और तय मानकों के अनुरूप काम न करने पर समझौता टूटने पर किसी तीसरी पार्टी से काम करने का विकल्प होगा। इसके अलावा दोनों पक्षों के बीच के विवाद अब कोर्ट कटहरी के बजाए मध्यस्थों की मदद से सुलझाएं जाएंगे।
इतना ही नहीं इस बिल में अनुबंध शर्तों को कठिन बना दिया गया है। बिल अच्छे ठेकेदारों के लिए अच्छा है और अपंजीकृत और नियमों को मानने वाले ठेकेदारों के लिए कड़ा है। यदि कोई ठेकेदार भाग जाता है तो परियोजना सालो साल लटकी रहती थी। लेकिन अब इस दशा में दूसरे ठेकेदार द्वारा योजना पूरी की जाएगी और पैसा आवंटित फर्म से ही वसूला जाएगा।
प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थलों और अवशेष संशोधन विधेयक 2018 को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है। संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने संशोधित विधेयक पेश किया। इस पर सदन में गरमागरम बहस शुरु हो गई।
कांग्रेस से जयराम रमेश और अंबिका सोनी समेत अन्य पाटयों के सांसदों के विरोध के चलते पास नहीं हो सका। अंबिका सोनी ने कहा कि विधेयक हमारी संस्कृति की जड़ों को प्रभावित करता है। क्योंकि वह पहले संस्कृति मंत्री रह चुकी हैं। इसलिए उन्हें लगता है इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए इसके सभी बदलावों को विशेषज्ञों की नजर से देखना चाहिए। इसलिए इसे आसानी से नहीं लिया जाना चाहिए।