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कानों देखी: राहुल गांधी पर ध्यान न दो, बस तूफान गुजर जाने दो

सार

पीएम नरेंद्र मोदी और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का भी मानना है कि जब कोई तूफान आ रहा हो तो उसकी चर्चा करके उसे और बड़ा बनाने की बजाय, उसके प्रभाव से बचने की तैयारी करनी चाहिए। अब यह संदेश धीरे-धीरे भाजपा के जमीनी कॉडर के पास तक है। 
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भारत जोड़ो यात्रा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जम्मू-कश्मीर में दाखिल हो चुकी है। इसी महीने श्रीनगर के लाल चौक पर यात्रा पूरी हो जाएगी। कांग्रेस इसके समापन समारोह की जोरदार तैयारी कर रही है। भाजपा नेताओं ने जब इस ग्रैंड डे को लेकर चर्चा शुरू की तो उन्हें शीर्ष स्तर से ताकीद किया गया। साफ कहा गया कि राहुल गांधी पर नहीं तैयारी पर ध्यान दो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह का भी मानना है कि जब कोई तूफान आ रहा हो तो उसकी चर्चा करके उसे और बड़ा बनाने की बजाय, उसके प्रभाव से बचने की तैयारी करनी चाहिए। अब यह संदेश धीरे-धीरे भाजपा के जमीनी कॉडर के पास तक है। हालांकि, कांग्रेस के नेता इसमें भी अपनी प्रसन्नता ढूंढ ले रहे हैं। एक महासचिव कहते हैं कि भाजपा ने जिस तरह से राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा से मुंह मोड़ा है, वह इसकी अभूतपूर्व सफलता है। पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है, जब भाजपा और संघ के नेता राहुल गांधी में मीन मेख निकालने में सफल नहीं हो पाए।

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई - फोटो : एएनआई
मोदी मैजिक से बसवराज बोम्मई, ईश्वरप्पा येदियुरप्पा सब सध गए
प्रधानमंत्री मोदी प्रखर राजनीतिज्ञ हैं। कहते हैं जब पेंच फंस जाता है तो उनके पास चुटकियों में समाधान होता है। इसकी पहली बानगी उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को वास्तविकता का एहसास कराकर किया और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से तकरार को साधने में सफल रहे। दूसरा बड़ा पेंच कर्नाटक में फंस रहा था। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा तीन बार सीएम बने और कभी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। कुछ समय से थोड़ा मुंह फुलाए थे। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का शासन कर्नाटक में भाजपा नेताओं को नहीं साध पा रहा था। वरिष्ठ नेता ईश्वरप्पा के अपने तेवर थे। बताते हैं भ्रष्टाचार से जुड़े ताजा आरोप के बाद ईश्वरप्पा के तेवर अब ढीले हैं। बसवराज ने दिल्ली से मिले निर्देश को वरीयता देना शुरू कर दिया है। बचे येदियुरप्पा। 16-17 जनवरी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आए तो प्रधानमंत्री की एक ट्रिक ने उन्हें साध दिया। येदियुरप्पा जैसे ही हाल में प्रवेश किए आगे की सभी कुर्सियां भरी थी। प्रधानमंत्री को समझते देर न लगी। भनके एक ईशारे पर पीयुष गोयल पीछे बैठ गए और येदिरप्पा तो मानो सीट पर नहीं, बल्कि सम्मान के आसन पर बैठ गए थे। अब आगे जो होना है, उसका असर सभी को पता है।
 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : twitter @Tejasvi_Surya
मेगा शो सफल हो जाए तो मुख्यमंत्री योगी गंगा नहा आएंगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने राज्य उ.प्र. में निवेश और विकास को लेकर काफी प्रयत्नशील हैं। 10-12 फरवरी 2023 को राज्य सरकार का मेगा-शो है। राज्य सरकार चाहती है कि उ.प्र. घोषणा में ही नहीं, जमीन पर भी उ.प्र. में कुछ जबरदस्त हो जाए। हालांकि, डिफेंस कॉरिडोर के नाम पर भारी भरकम घोषणा जरूर हुई थी, लेकिन कुछ कांक्रीट नहीं हो पाया था। इस बार तो मुख्यमंत्री ने अपने स्तर से काफी मेहनत की है। उ.प्र. दर्जनों अफसरों को भी बाकायदा टारगेट दिए गए थे। इस समय लोकभवन, एनेक्सी समेत सभी तमाम भवनों में बैठे बड़े अफसर इसी तैयारी में दिन रात एक किए हैं। अब देखना है कि उम्मीदें कितनी परवान चढ़ पाती हैं।  

मुलायम सिंह यादव। - फोटो : अमर उजाला
विश्वनाथ चतुर्वेदी भी क्या चीज हैं, फिर बढ़ा दिए मुलायम परिवार का पसीना
वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी भी गजब की बला हैं। हार नहीं मानते। उन्होंने मुलायम सिंह यादव परिवार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की शिकायत शुरू की थी। खूब लड़े। हालांकि अभी तक मुलायम सिंह यादव परिवार के रसूख के चलते चतुर्वेदी के खाते में सफलता सिफर ही है। धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। लेकिन एक बार फिर इसका जिन्न बोतल से बाहर आता दिखाई दे रहा है। सीबीआई की विशेष अदालत ने जहां मामले में संज्ञान ले लिया है, वहीं जांच एजेंसी के सक्रिय होने के संकेत नजर आने लगे हैं। अब आप समझ सकते हैं कि ऐसा हुआ तो उ.प्र. का ताकतवर राजनीतिक घराना आगे फिर नई कटीली राह को साधने में तंग हो सकता है। दिलचस्प यह भी है कि भाजपा के एक नेता इस नए डेवलपमेंट को खूब प्रचारित भी कर रहे हैं। वहीं विश्वनाथ चतुर्वेदी के चेहरे पर फिर से मुस्कराहट लौट रही है।मुस्कराने की वजह है। चतुर्वेदी के ऊपर भी गाहे-बेगाहे प्रचारित कई दाग धुल जाएंगे। चतुर्वेदी का कहना है कि ईमानदारी से जांच हो तो मुलायम परिवार का इसके लपेटे में आना तय है।
 

शिवराज सिंह चौहान - फोटो : पीटीआई
म.प्र. में मामा का चक्रव्यूह
मध्यप्रदेश में भाजपा इन दिनों मामा यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के चक्रव्यूह में उलझ कर रह गई है। मामा भी गजब हैं। साफ कहते हैं कि दिल्ली कहेगी तो वह दरी बिछाने के लिए तैयार हैं। हलांकि, दिल्ली उन्हें ऐसा नहीं कह पा रही है। मामा को अपने अलावा नरोत्तम मिश्रा, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयावर्गीज समेत सभी की महत्वाकांक्षाएं पता है। बताते हैं कि लोगों को उपकृत करने में मामा का कोई जवाब नहीं है। सभी को मामा और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के रिश्ते भी पता है। कमलनाथ के पास अपने चाटर्ड प्लेन और हेलीकॉप्टर भी हैं। इसके बहाने कमलनाथ को अपनी ताकत का भी पता है। ऐसे में भाजपा नेता दबी जुबान से कहते हैं कि शिवराज नहीं हटे तो नवंबर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में कमलनाथ और कांग्रेस की वापसी तय है। वहीं शिवराज खेमा के मुताबिक कदाचित पहले हटे तो कमलनाथ और नहीं हटे तो......। कुल मिलाकर कोई दूसरा पिक्चर में नहीं है। बस।
 

बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक के साथ अन्य पहलवान - फोटो : सोशल मीडिया
भाजपा के गले में अटके हैं बृजभूषण 
कुश्ती की महिला खिलाड़ियों ने भाजपा सांसद और कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए। मामले की गंभीरता देखकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने न केवल गंभीर मामला बताया बल्कि दिल्ली भी बात की। दिल्ली ने गंभीरता से लिया। अपने संसदीय हमीरपुर में बैठे खेल मंत्री से बात की। खेल मंत्री ने भी फोन घुमाया, लेकिन बृजभूषण ठहरे पुराने दबंग हैं। बताते हैं कि बृभूषण के अंदाज देखकर खेल मंत्रालय के भी हौसले पस्त होने लगे। अंत में उनकी प्रेस वार्ता और 22 जनवरी को कुश्ती महासंघ की बैठक को रद्द करने के लिए दिल्ली को जोर लगाना पड़ा। अभी तय नहीं है कि आगे क्या होगा? सरकार खिलाड़ियों की भी मान मनौव्वल में लगी है। दरअसल, इन दिनों भाजपा भी एक अजीब दौर से गुजर रही है। केवल बृजभूषण ही नहीं यौन उत्पीड़न का एक गंभीर आरोप पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन भी झेल रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने मामले में जांच का आदेश दिया है। हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह पर भी यौन उत्पीडऩ के ही आरोप हैं। महिला कोच ने लगाए हैं। उन्हें भी पद से इस्तीफा देना पड़ा है।
 
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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भूपेश बघेल का मैजिक और रमन सिंह को मिल गया हेलीकॉप्टर
अपने दम पर और राहुल गांधी के सामने अड़कर भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पाई थी। पिछले चार सालों में उन्होंने राज्य में अपना जमकर मैजिक दिखाया। कांग्रेस की अंदरुनी रिपोर्ट में भी भूपेश बघेल अव्वल चल रहे हैं। विरोधियों को साधने में भी भूपेश बघेल का जवाब नहीं। अब तो इसके मुरीद पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी हैं। हुआ यूं कि रमन सिंह को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की जनसभा में कोरबा में शामिल होना था। रमन सिंह का प्लान था कि जब अमित शाह रायपुर आएंगे तो उनके हेलीकॉप्टर में साथ में सवार हो लेंगे। ऐन वक्त पर गृहमंत्री ने गच्चा दे दिया। दो घंटे पहले रमन सिंह को पता चला कि केंद्रीय गृहमंत्री रांची से सीधे कोरबा पहुंचेगे। लिहाजा रमन सिंह के हाथ-पांव फूल गए। थक हारकर उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फोन घुमाया। पीड़ा बताई। बघेल एक पब्लिक मीटिंग में थे, लेकिन उन्होंने खुद की परवाह न करते हुए वहां हैलीपैड पर खड़े राज्य सरकार के हेलीकॉप्टर को रायपुर जाने और रमन सिंह को कोरबा ले जाने की व्यवस्था करा दी।
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