प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को झटका देते हुए मुंबई की एक विशेष पीएमएलए अदालत ने इकबाल मिर्ची के सहयोगी हारून यूसुफ को जमानत दे दी है। ईडी ने इसको 2019 में धन शोधन के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। दिवंगत इकबाल मिर्ची दाउद इब्राहिम का काफी करीबी रहा। मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया है कि यूसुफ ने अवैध गतिविधियों के माध्यम से अर्जित धन का उपयोग करके भारत में संपत्ति खरीदने में मिर्ची की सहायता की थी।
सुनवाई में देरी पर ईडी की खिंचाई
हालांकि, विशेष पीएमएलए (मनी लॉन्ड्रिंग अधिनियम की रोकथाम) अदालत के न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि केवल आरोपों को छोड़कर, यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं था कि यूसुफ को मिर्ची के धन के स्रोत के बारे में कोई जानकारी थी। न्यायाधीश ने मामले में सुनवाई में देरी के लिए केंद्रीय एजेंसी की भी खिंचाई की।
मिर्ची का 63 साल की उम्र में 2013 में लंदन में निधन हो गया था
मिर्ची के खिलाफ आईपीसी और एनडीपीएस एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) के प्रावधानों के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी ने उसके, उसके परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मिर्ची का 63 साल की उम्र में 2013 में लंदन में निधन हो गया था। मामले में 21 आरोपी हैं, जिनमें मिर्ची की पत्नी और बेटा, रियल एस्टेट कारोबारी कपिल और धीरज वाधवान और कुछ कंपनियां शामिल हैं।
2019 में गिरफ्तार किए गए युसूफ ने मामले की जांच के आधार पर और सीआरपीसी की धारा 436ए (दंड प्रक्रिया संहिता) के तहत भी जमानत मांगी थी और दावा किया था कि उसने न्यायिक हिरासत में 3 साल 6 महीने जेल में पूरे कर लिए हैं। अदालत ने संपत्ति खरीदने में इकबाल मिर्ची की मदद करने वाले शख्स को जमानत दी।