केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 12वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण का मुद्दा उठाया और पूछा कि आखिर डब्ल्यूटीओ को इसका समर्थन करने से क्या रोक रहा है? अभी तक खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण का कोई समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ व्यापार के लिए संगठन है लेकिन हर किसी को यह याद रखना चाहिए कि व्यापार से पहले भूख आती है और कोई खाली पेट व्यापार के रास्ते पर नहीं चल सकता है।
सम्मेलन में बातचीत के लिए खाद्य सुरक्षा सबसे अहम मुद्दों में से है। दुनियाभर में इसका सीधा प्रभाव लाखों लोगों के जीवन पर पड़ता है। विकासशील देशों में किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए कृषि न केवल आजीविका का साधन है बल्कि यह उनकी खाद्य सुरक्षा, उनके पोषण के लिए काफी महत्वपूर्ण है। कोरोना महामारी और मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति से उत्पन्न खाद्य संकट के कारण कई देश गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिस्र और श्रीलंका के मित्रों से इस बारे में बात हुई और हमें यह देखने की आवश्यकता है कि क्या मसौदा घोषणाओं और विचाराधीन फैसलों से उनके देशों में खाद्य उपलब्धता में सुधार करने में मदद मिलेगी। ये दोनों ही देश खाद्य सुरक्षा घोषणा के मसौदे पर सहमत नहीं हैं लेकिन उन्होंने सार्वजनिक भंडारण मुद्दे के तत्काल स्थायी समाधान का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे हालात में है जहां अस्थायी घोषणाओं से देशों को मदद नहीं मिल रही है बल्कि नौ साल से ज्यादा समय से लंबित सार्वजनिक भंडारण का स्थायी समाधान अभी तक बंद करने के लिए नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को भोजन की कमी वाले देश से बड़े पैमाने पर आत्मनिर्भर खाद्य राष्ट्र में स्थानांतरित करने का अनुभव रहा है। सब्सिडी और अन्य सरकारी हस्तक्षेपों के रूप में हमारे राज्य के समर्थन ने इस पर्याप्तता को हासिल करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए हम एलडीसी सहित सभी विकासशील देशों की ओर से सामूहिक रूप से अपनी यात्रा, अपने अनुभव के आधार पर लड़ रहे हैं।
उन्होंने डब्ल्यूटीओ के सदस्यों से अपील की कि वे सार्वजनिक भंडारण के स्थायी समाधान के इस कार्यक्रम पर गंभीरता से विचार करें ताकि दुनिया को यह संदेश जाए कि हम चिंता करते हैं। हम गरीबों की परवाह करते हैं। हम कमजोर लोगों की देखभाल करते हैं। हम खाद्य सुरक्षा की परवाह करते हैं। हम बाकी दुनिया के लिए कहीं अधिक संतुलित और न्यायसंगत भविष्य की परवाह करते हैं।
सम्मेलन के अंतिम दिन सभी नजरें भारत पर
डब्ल्यूटीओ का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन बुधवार को अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया लेकिन अनिश्चितता जस की तस बनी हुई है कि वैश्विक व्यापार नियमों में बदलाव को लेकर कोई सहमति बन पाएगी या नहीं। साथ ही खाद्य सुरक्षा, मत्स्य समझौते और वैक्सीन के मसले पर सभी की नजरें भारत पर टिकी हुई हैं। साढ़े चार साल बाद हुए सम्मेलन में 164 सदस्यीय डब्ल्यूटीओ कोरोना महामारी, मछली पकड़ने पर दी जाने वाली सब्सिडी में कमी, खाद्य सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को शुरू करने पर आम सहमति की उम्मीद कर रहा है।
डब्ल्यूटीओ निदेशक नगोजी ओकोंजा इवेला ने मौजूद 100 से अधिक मंत्रियों से कहा कि समय खत्म हो रहा है और उन्हें मुद्दों का हल निकालने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी चाहिए। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों का कहना था कि भारत किसी समझौते के मूड में नहीं लगता है। इसके संकेत भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की बंद बैठकें में जताए गए रुख से मिलते हैं। भारत, दक्षिण अफ्रीका और अन्य विकासशील देश वैक्सीन, उपचार और डायगोनिस्ट के लिए अगले एक साल तक बौद्धिक संपदा अधिकारों से छूट चाहते हैं लेकिन इसका कई विकसित देश विरोध कर रहे हैं।