राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि शिक्षा महिलाओं के सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सिक्किम विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में कहा कि मेडल पाने वाले छात्रों में बड़ी संख्या छात्राओं की होना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। गंगटोक में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उपलब्धियों में छात्राओं की सफलता यह दिखाती है कि शिक्षा न केवल जीवन बदलती है, बल्कि समाज को भी मजबूत बनाती है।
उन्होंने कहा, मुझे यह जानकर खुशी हुई कि मेडल प्राप्त करने वाले 70 प्रतिशत छात्र छात्राएं हैं। शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता। उल्लेखनीय है कि इससे पहले खराब मौसम के कारण राष्ट्रपति का भारत-चीन सीमा स्थित नाथू ला दौरा रद्द कर दिया गया। वहां उनका सेना के जवानों से बातचीत का कार्यक्रम निर्धारित था।
राष्ट्रपति ने छात्राओं की मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता के लिए कई 'मंत्र' भी दिए। उन्होंने कहा कि युवा अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखें, दूसरों से सीखें, सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ें, अपने लक्ष्य तय करें और विकसित भारत के निर्माण में आत्मनिर्भर योगदानकर्ता बनें।
राष्ट्रपति मुर्मू ने बुधवार को शुरू की गई महिलाओं के लिए विशेष बस सेवा 'पिंक सिटी रनर-आमा दिदी बहिनी बस सेवा' का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस पहल में शामिल होने का अवसर देने के लिए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग का आभार जताया। गंगटोक में शुरू की गई यह बस सेवा पूरी तरह महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित होगी और केवल महिला यात्रियों के लिए समर्पित है।
अपने तीन दिवसीय सिक्किम दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संरक्षण की भी सराहना की। उन्होंने कंचनजंघा पर्वत को सिक्किम का आराध्य देवता बताते हुए कहा कि राज्य ने विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि 2016 में सिक्किम का देश का पहला जैविक राज्य बनना सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने राज्य को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ बनाए रखने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
राष्ट्रपति ने सिक्किम विश्वविद्यालय से पूर्वोत्तर और सिक्किम की संस्कृति एवं परंपराओं को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने विश्वविद्यालय के 'सेंटर फॉर एंडेंजर्ड लैंग्वेजेज' के जरिए पूर्वोत्तर और उत्तर बंगाल में बोली जाने वाली विलुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि विश्वविद्यालय में ग्लेशियोलॉजी और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
दीक्षांत समारोह में 2023, 2024 और 2025 शैक्षणिक वर्षों के स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल और पीएचडी कार्यक्रमों के कुल 13,782 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए स्वर्ण और रजत पदक पाने वाले 285 विद्यार्थियों में 199 छात्राएं थीं। इससे पहले खराब मौसम के कारण राष्ट्रपति का भारत-चीन सीमा स्थित नाथू ला दौरा रद्द कर दिया गया। वहां उनका सेना के जवानों से बातचीत का कार्यक्रम निर्धारित था।