चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की खोज और गुणवत्ता के लिए भारत और जापान अपने यान लॉन्च करेंगे। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी 'इसरो' इसके लिए लैंडर तैयार करेगी, जबकि जापानी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी लॉन्च और चंद्र रोवर बनाएगी। इसका डाटा चंद्रमा पर स्थायी जीवन की तलाश में महत्वपूर्ण होगा। इसरो 2040 तक चांद पर इन्सान को भेजने और 2047 तक अपना स्थायी बेड़ा बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। इसके लिए चंद्रयान-4 पर काम चल रहा है, जिसके लिए भी 2025 काफी महत्वपूर्ण है।
चांद की परिक्रमा करेगा मनुष्य
नासा चांद पर पहली महिला और पहले अश्वेत यात्री को लैंड कराने के लिए मिशन आर्टेमस पर काम रहा है। ये दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे, जो कि पहली बार होगा। तीन चरणों में पूरा होने वाले इस मिशन का दूसरा चरण आर्टेमस-2 इस साल सितंबर में लॉन्च होगा। यह चार यात्रियों के साथ चंद्रमा की परिक्रमा कर लौटेगा और 2026 में तीसरे चरण के मिशन के लिए आधार तैयार करेगा।
निजी क्षेत्र की भागीदारी अहम
2025 में चंद्रमा पर निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी। अमेरिकी निजी एयरोस्पेस फर्म फायरफ्लाई जनवरी के मध्य में ब्लू घोस्ट लैंडर को लॉन्च करेगी। यह इस साल के शुरुआती चंद्र मिशनों में से एक है। यह एक्स-रे कैमरों और मून नेविगेशन सिस्टम से लेकर हीट ट्रांसमिशन को मापने के लिए चंद्रमा की सतह पर ड्रिल करने के लिए कई उपकरण ले जाएगा।
मिशन आईएम-2 लॉन्च होगा
2024 में चंद्रमा पर लैंडर भेजने वाली पहली निजी कंपनी 'अमेरिकी निजी एयरोस्पेस फर्म इंट्यूटिव मशीन्स' इस साल अपना अलग मिशन आईएम-2 लॉन्च करेगी, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुप पर ड्रिल कर वहां दबी बर्फ के नमूने जुटाएगा।
तीसरा लैंडर एआई-3 भी लॉन्च होगा
'अमेरिकी निजी एयरोस्पेस फर्म इंट्यूटिव मशीन्स' इसी साल अपना तीसरा लैंडर एआई-3 भी लॉन्च करेगी।
'मिशन बेरेशीट' को चांद पर भेजा जाएगा
इस्राइली कंपनी 'स्पेसआईएल' 2019 में असफल होने के बाद 2025 में एक बार फिर 'मिशन बेरेशीट' को चांद पर भेजेगी। यह दो लैंडर लेकर जाएगा, जो चांद पर दो अलग-अलग क्षेत्रों में खोज करेंगे।