रजत जयंती मना रही समाजवादी पार्टी ने सभी सपा नेताओं को एक मंच पर लाकर ये साबित करने की कोशिश की कि पार्टी में सबकुछ ठीक है। साथ ही वह अन्य दलों के साथ महागठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में जाना चाहती है। लेकिन क्या सही मायने में सब कुछ ठीक है, ऐसा प्रतीत होता नहीं है।
क्योंकि अगर सब कुछ ठीक होता तो मुख्यमंत्री अखिलेश ने बेनी प्रसाद के पैर तो छूए लेकिन चाचा शिवपाल को दूर से प्रणाम किया। दोनों में कोई दूरियां नही हैं ये दिखाने के लिए लालू यादव को दोनों का हाथ मिलवाना पड़ा। इसके बाद ही अखिलेश ने चाचा के पैर छुए।
यही नहीं शिवपाल ने जहां भतीजे अखिलेश के समर्थक को मंच पर धक्का दे दिया,वहीं भतीजे अखिलेश ने ये तक कह दिया कि अगर तलवार दी है तो उसे चलाएंगे। वहीं अगर महागठबंधन की बात की जाए तो सपा ने लालू, अजीत सिंह, शरद यादव और देवगौड़ा को एक मंच पर लाकर ये तो दिखाया की सपा चुनाव महागठबंधन के सहारे लड़ने और जीतने का सपना संजो रही है।
लेकिन क्या वाकई सपा को सहयोगी दल मदद करने में सक्षम हैं या वो सपा के सहारे खुद ही वोट बैंक तलाश रहे हैं। ये तो आने वाला समय बताएगा की कौन किसके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।