क्या उत्तर प्रदेश में 2019 के लोकसभा को चुनाव को ध्यान में रखकर सपा-बसपा का गठबंधन हो गया है? इस सवाल का आधिकारिक जवाब आना बाकी है। इस सवाल पर सपा और बसपा कुछ नहीं बोल रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के एक प्रमुख नेता ने कहा कि अंतिम रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि गठबंधन को लेकर उनसे या उनके पार्टी के किसी नेता से कोई बात नहीं हुई है। सूत्र का कहना है कि गठबंधन को लेकर कोई भी फैसला जनवरी के अंतिम या फरवरी के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है। उस समय की घोषणा की अंतिम होगी। वरिष्ठ राजनेता के मुताबिक अभी गठबंधन को लेकर सपा और बसपा दोनों की मजबूरियों का दौर चल रहा है।
कांग्रेस से खफा हैं मायावती!
समाजवादी पार्टी के एक पूर्व सांसद का कहना है कि गठबंधन को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में एक राय है। सभी गठबंधन चाहते हैं। गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक राज्य के लोग चाहते हैं कि कांग्रेस, सपा, बसपा और रालोद का गठबंधन हो। ऐसा होने पर राज्य में भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव में 80 में से दस सीटों के आस-पास रह जाएगी। सूत्र का कहना है कि महागठबंधन की इस मांग की अनदेखी नहीं की जा सकती। हालांकि सूत्र का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती कांग्रेस से कुछ खफा हैं और सपा का एक बड़ा धड़ा में इस राजनीतिक गठजोड़ में कांग्रेस से परहेज किए जाने के पक्ष में है।
राजनीतिक मजबूरी के आगे बेबस हैं माया और अखिलेश
राष्ट्रीय लोकदल के सूत्र का मानना है कि अभी बसपा की कुछ राजनीतिक मजबूरियां हैं। बहुत हद तक संभावना है कि बसपा इन मजबूरियों के चलते चुनाव पूर्व राजनीतिक दलों से तालमेल को लेकर अपने पत्ते खोलने से बच रही है। अभी चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी भी देश में नहीं हैं। पिता-पुत्र सपरिवार विदेश दौरे पर हैं। नये साल में बाहर हैं। चौधरी अजीत सिंह बाद में गए हैं और जयंत से पहले से हैं। पांच जनवरी की रात में चौधरी अजीत सिंह को वापस आना है। रालोद सूत्रों का कहना है कि गठबंधन में यदि रालोद शामिल है तो बिना चर्चा के यह आखिर अंतिम रूप कैसे ले सकता है।
कल अखिलेश आए थे, आज लौट गए
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 4 जनवरी को दिल्ली आए थे। शनिवार पांच जनवरी को करीब एक बजे लखनऊ के लिए लौट गए। इस दौरान उन्होंने व्यक्तिगत मुलाकात की है। समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर का कहना है कि गठबंधन के मामले में अखिलेश और मायावती की सीधी बात हो रही है। इसमें कोई और शामिल नहीं है। लाठर का कहना है कि अभी बसपा और सपा साथ हैं। राष्ट्रीय लोकदल भी हम दोनों के साथ है, लेकिन पार्टी ने अभी कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह अंतिम फैसला नहीं है। अंतिम फैसला जनवरी के अंत तक सामने आ सकता है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजबब्बर का भी कहना है कि गठबंन पर कुछ भी बोलना जल्दबाजी होगी।
यादव सिंह, गायत्री कराएंगे गठबंधन का फैसला
समाजवादी पार्टी के कोटे से राज्यसभा पहुंचे प्रमुख सूत्र की मानें तो भष्टाचार के आरोप में सीबीआई की गिरफ्त में आए यादव सिंह या फिर बलात्कार के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे चल रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति गठबंधन का फैसला कराएंगे। उत्तर प्रदेश की राजनीति की नब्ज को समझने वाले सूत्र ने अनौपचारिक बातचीत के दौरान संसद भवन परिसर में बताया कि सपा-बसपा या महागठबंधन के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। बस इतना जान लीजिए कि जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा।