संसद के अंदर विपक्षी दलों की एकता आखिर दम तोड़ गई। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार शाम को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई थी, लेकिन समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने इससे कन्नी काट ली। इस बैठक को बाद में यूपीए की बैठक में बदल दिया गया।
वहीं, सपा और बसपा का कहना है कि सोनिया गांधी यूपीए के सदस्य दलों को बुला सकती हैं, लेकिन सभी विपक्षी दलों को बुलाने का अधिकार उन्हें नहीं है। हालांकि इन दलों का मानना है कि संसद में किसी अहम बिल या किसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्षी एकता की जरूरत होगी तो मिल बैठकर अन्य दलों के साथ तालमेल हो जाएगा।
फिलहाल, न तो चुनाव होने वाले हैं और न ही ऐसा कोई अवसर निकट भविष्य में होगा जिसके लिए विपक्षी एकता की आवश्यकता होने की संभावना है। चूंकि राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है, इस वजह से विपक्ष के तालमेल की वजह से तीन तलाक सहित कई अहम बिल वहां अटक गए थे।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विपक्षी एकता खत्म होने के बाद भाजपा इन बिलों को राज्यसभा में पारित करा पाने में सफल होगी या उसे एक साल और इंतजार करना होगा जब राज्यसभा में एनडीए को बहुमत मिल जाएगा।