लद्दाख को अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीले पहाड़ों के लिए जाना जाता है। इसकी खासियत को बहुत जल्द एक चीज और खास बनाने वाली है। यहां दुनिया का सिंगल लोकेशन वाला सोलर प्लांट लगने वाला है। दक्षिण कारगिल से 200 किलोमीटर की दूरी पर बनाए जाने वाला यह प्लांट बिजली पैदा करके मैदानों को रौशन करेगा और ग्लेशियर्स को ठंडा रखने का कार्य करेगा। इससे हर साल 12,750 टन कार्बन उत्सर्जन को बचाया जा सकेगा।
इस प्लांट से डीजल जेनसेट पर निर्भरता खत्म हो जाएगी और यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का माध्यम बनेगा जिनका 6-8 महीने तक बाहरी दुनिया से संपर्क कटा रहता है। नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाले सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) जम्मू और कश्मीर में परियोजनाओं को प्रचार कर रही है। माना जा रहा है कि साल 2023 तक लद्दाख में 5,000 मेगा वॉट और कारगिल में 2,500 मेगा वॉट की यूनिट तैयार हो जाएगी
इन परियोजनाओं पर लगभग 45,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। लद्दाख परियोजना न्योमा के हानले-खाल्दो पर स्थित होगी। यह स्थान रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है और लेह से 254 किलोमीटर दूर है। कारगिल परियोजना जंस्कर के सुरू में बनाई जाएगी जो जिला मुख्यालय से 254 किलोमीटर दूर है। लद्दाख परियोजना की ऊर्जा को हरियाणा के कैथल तक लेह मनाली सड़क पर 900 किलोमीटर की लाइन बिछाकर पहुंचाया जाएगा।
कारगिल परियोजना श्रीनगर के पास न्यू वंपोह में ग्रिड से जुड़ेगी। एसईसीआई के निदेशक (पावर सिस्टम) एसके मिश्रा ने कहा, 'हमने पिछले टेंडर्स में आई परेशानियों पर गौर किया है और साथ ही परियोजना की चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर विचार करके उन्हें दूर करने की कोशिश की है। दूसरी सकारात्मक बात यह है कि लेह और कारगिल प्रशासन ने 25,000 और 12,500 एकड़ की गैर चरागाह भूमि को पारिश्रमिक कीमतों पर नामित किया है जो सालाना 3 प्रतिशत की दर से प्रति हेक्टेयर 1,200 रुपये का लाभ कमाएगी।'
मिश्रा ने आगे कहा, 'जमीन की पहचान होना उन प्रमोटर्स के लिए राहत का संकेत है जो साइट विजिट पर आ रहे हैं और एकांत जगह, खराब मौसम होने के बावजूद भी परियोजना में अपनी रुची दिखा रहे हैं।' उम्मीद है कि यह परियोजना सीमा के दूरस्थ स्थानों पर विकास में सहायक होगी और स्थानीय लोगों को स्किल रोजगार के जरिए सशक्त बनाएगी। उन्हें सोलर पैनल की सफाई और ट्रांसफर के रख-रखाव आदि का काम मिलेगा।